NTPC और भू-विस्थापितों के बीच टकराव..ग्रामीण बोले नौकरी देना नहीं चाहते, टेस्ट तो सिर्फ बहाना है – RGH NEWS
रायगढ़ न्यूज़ (समाचार)

NTPC और भू-विस्थापितों के बीच टकराव..ग्रामीण बोले नौकरी देना नहीं चाहते, टेस्ट तो सिर्फ बहाना है

RGHNEWS प्रशांत तिवारी नौकरी की मांग को लेकर लारा के लैंड लूजर्स (भू-विस्थापित) और एनटीपीसी प्रबंधन में फिर एक बार ठन गई है। जून में कलेक्टर और एनटीपीसी के अफसरों के बीच बैठक में पहले चरण के लिए 121 युवाओं को स्थाई रोजगार देने पर सहमति बनी थी। लेकिन प्रबंधन ने पुराने 79 स्वीकृत पदों पर भर्ती शुरू की, इस सूची में भी 29 प्रभावित युवा बेरोजगारों का नौकरी के लिए पात्र बताया गया। टेस्ट लिया गया, इनमें 11 लोग पास हुए। डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद सिर्फ 8 लोग ही नौकरी देने योग्य बताए गए। प्रभावित परिवारों के युवा सदस्य एनटीपीसी द्वारा ली गई परीक्षा को नियम के विरूद्ध बता रहे हैं। उनके अनुसार छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति के तहत भू-विस्थापितों को पक्की नौकरी देने के लिए नियम में कहीं भी परीक्षा का उल्लेख नहीं है, लेकिन एनटीपीसी सभी पीड़ित परिवारों को रोजगार देने से बचने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहा है। पुनर्वास नीति के विपरीत भर्ती प्रक्रिया पर कलेक्टर ने भी एनटीपीसी के अफसरों से बात की थी, लेकिन इसके बाद भी वे अपनी मनमानी कर रहे हैं। फिलहाल प्रभावित परिवारों के युवा बेरोजगार एनटीपीसी के सामने तंबू लगा 32 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। कलेक्टर भीम सिंह इस मामले में कहते हैं कि एनटीपीसी ने प्रदेश की पुनर्वास नीति का पालन नहीं किया। उन्होंने नौकरी के बदले बोनस की अपनी पॉलिसी मानने की बात कही लेकिन एनटीपीसी की पॉलिसी राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं है मतलब पात्र लोगों को नौकरी देनी पड़ेगी।

राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड को 16 सौ पद खाली बताए
एनटीपीसी के सामने धरने पर बैठे युवाओं ने बताया कि एनटीपीसी ने रायपुर में हुई राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक में कुल 16 सौ पद रिक्त होने की बात कही थी, लेकिन नियुक्ति देने में आनाकानी कर रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से आईटीआई, डिप्लोमा इंजीनियर्स, ग्रेजुएट इंजीनियर्स, एमएससी, बीएससी, बीकॉम, सामान्य ग्रेजुएट युवाओं को नौकरी देने की बात कही गई थी।

फैक्ट फाइल

  • 09 प्रभावित गांव
  • 2429 प्रभावित किसान
  • 780 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण
  • 187 करोड़ मुआवजा स्वीकृत
  • 1816 को 117 करोड़ का दे चुके मुआवजा
  • 613 प्रभावितों ने नहीं लिया मुआवजा
  • 1 मेगावाट उत्पादन पर 0.2 कर्मचारी का सेटअप, मतलब अभी 1600 मेगावाट प्रोडक्शन में 320 कर्मचारी ही रखे जा सकते हैं। अभी 307 काम कर रहे हैं, यानि अभी सिर्फ 17 पदों पर ही नौकरी मिल सकती है।

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