अजीत जोगी के गढ़ पर BJP-कांग्रेस की नजर, किसकी होगी चुनावी दिवाली ? पढ़ें पूरी खबर – RGH NEWS
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अजीत जोगी के गढ़ पर BJP-कांग्रेस की नजर, किसकी होगी चुनावी दिवाली ? पढ़ें पूरी खबर

रायपुर. छत्तीसगढ़ के एकमात्र सीट मरवाही में होने वाले विधानसभा उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है. घोषणा के मुताबिक 03 नवंबर को मतदान और 10 नवंबर को मतगणना होनी है. चुनावी घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता  लागू कर दी गई है. मरवाही उपचुनाव के ऐलान के साथ ही सियासतदान जीत के गुणा गणित में जुट गए हैं. सत्ताधारी दल कांग्रेस, प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी सहित जोगी कांग्रेस इस सीट को प्रतिष्ठा का सवाल बना चुकी है, क्योंकि मरवाही में जीत-हार प्रदेश के आगामी राजनीति पर सीधा असर डालेगी.दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और जोगी कांग्रेस के संस्थापक अध्यक्ष अजीत जोगी के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी.

कांग्रेस 20 महीने में किए गए विकास के दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी. मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि चुनाव का ऐलान अभी हुआ है. कांग्रेस एक महीने पहले से तैयारियों में जुट गई थी. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के कई दौर की बैठक हो चुकी है. हमने बूथों में 20-20 लोगों को चिन्हांकित कर लिया है. जीत का पूरा विश्वास है. तो वहीं बीजेपी सरकार की नाकामियों के सहारे तो जोगी कांग्रेस अजीत जोगी के नाम पर चुनावी जीत का दम्भ भर रही है. चुनावी ऐलान के साथ ही जीत हार के दावे शुरू हो गए. बीजेपी सांसद सुनाली सोनी ने आरोप लगाया है कि सरकार सरकारी मशीनरी के सहारे चुनाव जीतना चाहती.  तो वहीं जोगी कांग्रेस मरवाही को जिला बनाने, 313 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के भूमिपूजन-लोकार्पण को चुनावी चाल करार दे रही है. जोगी कांग्रेस प्रवक्ता भगवानू नायक का  कहना है कि जोगी परिवार और मरवाही की जनता एक दूसरे के पूरक हैं. जनता दूसरे दलों के बहकावे में नहीं आएगी.

 एक नज़र मरवाही के सियासी सफर पर

आदिवासी नेता भंवर सिंह पोर्ते ने 1972 ,1977 और 1980 के चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाई.
* 1985 में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया.
* 1985 में कांग्रेस के दीनदयाल विधायक बने.
*1990 में भंवर सिंह पोर्ते बीजेपी के टिकट पर विधायक बने.
*1993 कांग्रेस के पहलवान सिंह विधायक बने.
* 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के लिए तत्कालीन भाजपा विधायक रामदयाल उइके ने इस्तीफा दिया.
* उपचुनाव में अजीत जोगी रिकॉर्ड मतों से जीते.
*2003 के चुनाव में अजीत जोगी ने बीजेपी के कद्दावर नेता और नन्दकुमार साय को 5416 मतों से पटखनी दी.
* 2008 में अजीत ने बीजेपी के ध्यान सिंह पोर्ते को 42092 वोटों से हराया.
* 2013 में अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी ने बीजेपी की समीरा पैकरा को प्रदेशभर में सर्वाधिक 46 हजार वोटों से हराया.
* 2018 में अजीत जोगी अपनी पार्टी से चुनाव लड़कर बीजेपी की अर्चना पोर्ते को 46462 मतों से हराया.
* 2018 चुनाव में कांग्रेस के गुलाब राज अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए.

हाईप्रोफाइल होगा मुकाबला

ऐसा माना जाता रहा है कि अजीत जोगी के नाम पर ही मरवाही की जनता मत देते आई है. बहरहाल अजीत जोगी के निधन के बाद होने वाले इस चुनाव में ऊंट किस करवट बैठता है, यह तो वक्त ही तय करेगा. मगर यह तो तय है कि चुनाव काफी हाईप्रोफाइल और हाई वोल्टेज होने वाला है. अब तो 10 नवम्बर को ही पता चलेगा की दिवाली किसकी होती है और चुनावी दिवाला किसका निकलता है.

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