Gig Worker Strike: ऑनलाइन डिलीवरी एप्स और प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स आज हड़ताल पर, देखे आम जनता पर क्या -क्या? पड़ेगा असर – RGH NEWS
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Gig Worker Strike: ऑनलाइन डिलीवरी एप्स और प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स आज हड़ताल पर, देखे आम जनता पर क्या -क्या? पड़ेगा असर

Gig Worker Strike:   मंगलवार यानि आज 3 फरवरी 2026 को देशभर के गिग वर्कर्स जैसे जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो के राइडर्स ने अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने और काम बंद करने घोषणा की है. यह विरोध प्रदर्शन गिग एंड प्लेटफार्म सर्विस वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व में हो रहा है. इससे पहले भी 26 जनवरी को भी उन्‍होंने हड़ताल की थी, लेक‍िन उस समय कोई समस्याओं का हल नहीं न‍िकल पाया था.तो चलिए जानते हैं क‍ि ग‍िग वर्कर्स ये हड़ताल क्‍यों कर रहे हैं और उनकी क्‍या मांगे हैं.

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हड़ताल करने की वजह क्या? है

गिग वर्कर्स का कहना है कि वे लंबे समय से सिस्टम के s का शिकार हो रहे हैं. उनकी बड़ी शिकायतों में से एक कम आमदनी और सुरक्षा की कमी होना भी है. इसके अलावा और भी कई वजहें हैं.

बिना बताए ID ब्लॉक करना: कंपनियां बिना किसी ठोस जांच या नोटिस के वर्कर्स की आईडी ब्लॉक कर देती हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी छिन जाती है.

असुरक्षित 10-मिनट डिलीवरी : हालांक‍ि इसमें काफी हद तक राहत म‍िली है, लेक‍िन अब भी कई स्थानों पर 10 मिनट में सामान पहुंचाने के दबाव की वजह से राइडर्स की जान जोखिम में रहती है और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं.

कम आमदनी और कोई सुरक्षा नहीं: पेट्रोल के दाम में वृद्धि रही हैं, लेकिन प्रति ऑर्डर मिलने वाला पैसा घटता जा रहा है. साथ ही, उन्हें न तो पेंशन मिलती है और न ही बीमा की सही सुविधा.

महिलाओं की सुरक्षा: महिला गिग वर्कर्स खास तौर पर अर्बन कंपनी जैसी ब्यूटी और घरेलू सेवाओं वाली ने सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान की कमी को लेकर अपनी आवाज उठाई है.

गिग वर्कर्स की मांग का मुख्य उद्देश्य है..??

केंद्रीय कानून: गिग वर्कर्स को मजदूर के रूप में औपचारिक पहचान मिले और उनके लिए एक अलग केंद्रीय कानून बने.

न्यूनतम वेतन: कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान या 24,000 रुपये मासिक वेतन तय हो.

ID ब्लॉकिंग पर रोक: बिना पारदर्शी जांच के आईडी ब्लॉक करने के सिस्टम को तत्काल समाप्त किया जाए.

सामाजिक सुरक्षा: ईएसआई (ESI), पीएफ (PF) और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं अनिवार्य हों.

पारदर्शी एल्गोरिदम: कंपनियां अपने उस ‘सॉफ्टवेयर/एल्गोरिदम’ को पारदर्शी बनाएं जिससे राइडर्स की रेटिंग और कमाई तय होती है.

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आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?

जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो से खाना या राशन मंगाने वालों को देरी या सर्विस Unavailableजैसे मैसेज दिख सकते हैं. इसके अलावा ओला और उबर जैसी सेवाओं पर भी इसका आंशिक असर हो सकता है. ई-कॉमर्स जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट आद‍ि की डिलीवरी भी कुछ इलाकों में प्रभावित हो सकती है.

 

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