India Russia Oil Trade: भारत और रूस के तेल व्यापार पर उठा सवाल, क्या सच में टूट जाएगी पुतिन से सालों पुरानी दोस्ती, पढ़े पूरी खबर

अमेरिका और भारत के बीच तेल व्यापार समझौता एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँच गया है। इस समझौते के अंतर्गत अमेरिका ने भारत पर लागू टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ये भी दावा किया है कि भारत अब रूस से तेल खरीदने की बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए सहमत हो गया है। इस स्थिति में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इससे भारत और रूस के बीच की दोस्ती प्रभावित होगी? क्या भारत सच में रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा?
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यूक्रेन के कारण लगाया था 25 प्रतिशत टैरिफ
जानकरी के अनुसार भारत अपनी जरूरत के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत तेल दूसरे देशों से आयात करता है. इसमें से 35 प्रतिशत तेल रूस से खरीदा जाता है, लेकिन यूक्रेन से युद्ध के कारण अमेरिका को यह तेल व्यापार आँखों में चुभ गया. अमेरिका ने आरोप लगाया कि रूस से तेल खरीदकर भारत फंडिंग कर रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ने की हिम्मत मिलती है. इसलिए भारत पर अमेरिका की ट्रंप सरकार ने 25 प्रतिशत पैनल्टी टैरिफ लगा दिया, हालांकि 25 प्रतिशत टैरिफ पहले से लगाया हुआ था.
टैरिफ से भारत का हो रहा था आर्थिक नुकसान
अमेरिका ने कई बार भारत को रूस से तेल न खरीदने को कहा, लेकिन भारत ने जनहित का हवाला देकर कोई निर्णय नहीं लिया गया. अब जब अमेरिका ने टैरिफ लगा दिया तो भारत को नुकसान होने लगा. भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है, लेकिन टैरिफ के कारण अमेरिका को निर्यात कम हो गया था. अमेरिका को भारत के निर्यात में 30 बिलियन डॉलर की गिरावट आ गई थी, जिससे भारतीयों के लिए नौकरियों का खतरा पैदा हो गया था और बिजनेस-इंडस्ट्री को भी नुकसान होने लगा था.
रूस-भारत के आपस में संबंध कैसे है..??
आपको बता दें कि भारत और रूस के तेल व्यापार को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से किए गए वादों पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई जानकरी साझा व्यक्त नहीं की गई है, लेकिन पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि भारत के साथ रूस की दोस्ती काफी पुरानी है. भारत-रूस के रक्षा समझौते आपस में काफी कठोर हैं. 2019 से 2023 के बीच रूस और भारत के बीच 36 प्रतिशत रक्षा समझौते हुए. 2024-25 में भारत ने रूस के साथ 131 बिलियन डॉलर का व्यापार किया और भारत को रूस से सस्ता तेल भी मिलता है.
संकट में भारत का मजबूत रहा है रूस
आपको बता दें कि स्वतंत्रता के बाद से ही भारत और रूस की दोस्ती रही है. संकट मे भारत मे मजबूत दोस्त बनकर हमेशा रूस हमेशा खड़ा रहा है.बहुत बार ऐसा भी हुआ है, जब अमेरिका ने भारत को साइड किया या भारत के खिलाफ एक्शन लिए, वहीं रूस साथ देता रहा. 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय रूस ने यूनाइटेड नेशन्स में भारत का साथ दिया था, जबकि अमेरिका ने पाकिस्तान की सहायता करते हुए हिंद महासागर में अपना सैन्य बेड़ा भेज दिया था और यह एक्शन भारत के विरोध में था.
भारत और रूस का रक्षा समझौता तेल व्यापार से बड़ा और मजबूत है
भारत ने जब 1998 में परमाणु जाँच किया था तो अमेरिका ने विरोध किया था. रूस पर भारत को हथियार न देने का दबाव बनाया था, लेकिन रूस उस बहकावे में नहीं आया और भारत को हथियारों की सप्लाई भी बंद नहीं की थी, लेकिन हमारा भारत गुट निरपेक्ष राष्ट्र है, इसलिए रूस और अमेरिका के साथ अच्छा संबंध रखना भारत का स्वभाव है. इसलिए रूस से तेल की खरीदी न करने का अर्थ यह नहीं होगा कि रूस के साथ संतुलन बिगड़ जायेंगे, क्योंकि भारत और रूस का रक्षा समझौता तेल व्यापार से बड़ा और मजबूत है.



