Ground zero Review: इमरान हाशमी की फिल्म Ground zero हुआ रिलीज, पढ़ें यहां रिव्यू… – RGH NEWS
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Ground zero Review: इमरान हाशमी की फिल्म Ground zero हुआ रिलीज, पढ़ें यहां रिव्यू…

Ground zero Review पहलगाम में जो हुआ उसके बाद से देश गुस्से में है, हर कोई चाहता है कि पहलगाम में टूरिस्टों को बेहरमी से मारने वाले आतंकियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और उन्हें सजा दी जाए. ऐसे में एक फिल्म जिसमें गाजी बाबा जैसे खूंखार आतंकी को मारने की कहानी है, उसे जबरदस्त इमोशन जगा देना चाहिए लेकिन ये फिल्म ऐसा करने में फेल हो जाती है. ये बस कहानी बताती है, वो कहानी जो हमने पढ़ी है. ये फिल्म इमोशन फील नहीं करवाती. उरी, हैदर, कश्मीर फाइल्स मिशन कश्मीर जैसी किसी भी फिल्म वाला इमोशन आप यहां फील नहीं करते और इन सबके मुकाबले भी और कश्मीर पर भी बनी ये एक बेहद कमजोर फिल्म साबित होती है.

 

 

 

कहानी

ये कहानी है बीएसएफ ऑफिसर नरेंद्र नाथ दुबे की जिन्होंने खतरनाक आंतकी गाजी बाबा को मौत के घाट उतार दिया है. इस मिशन में बीएसएफ के बेस्ट मिशन में से एक माना गया लेकिन इस कहानी को बस इसी लाइन की तरह पेश कर दिया गया. उसमें एक फिल्म के लिए जरूरी इमोशन और ड्रामा नहीं डाला गया.

 

 

कैसी है फिल्म

इन दिनों कश्मीर के पहलगाम को लेकर जो गुस्सा था वो देखकर लगा था कि इस फिल्म को देखने लोग आ सकते हैं. लेकिन थिएटर में कुल 2 ही लोग थे, इस फिल्म की कहानी इसकी जान थी लेकिन अच्छी कहानी को खराब स्क्रीनप्ले और राइटिंग ने बर्बाद कर दिया. फिल्म शुरुआत में कश्मीर से जुड़ी कुछ और चीजें दिखाती है जो हम कई बार देख चुके हैं. आजकल वेब सीरीज के जमाने में तो ये सब डिटेल में दिखाया जाता है. गाजी बाबा जैसे खूंखार आंतकी को ठीक से दिखाया तक नहीं जाता. उसके खौफ को दिखाने में ये फिल्म पूरी तरह से नाकाम रहती है. ना गाजी बाबा के रोल में किसी दमदार एक्टर को लिया गया, और जब विलेन ही कमजोर होगा तो फिल्म का कमजोर होना तय है. फिल्म में इमोशन फील ही नहीं होते. ऐसा कोई सीन नहीं है जब आप ताली बजाएं या आपके रौंगटे खड़े हों. ये फिल्म बस चलती है, आज तो देश गुस्से में है, पहलगाम के आतंकियों को सजा देने की बात कही जा रही है. ऐसे में कश्मीर पर इमोशन और ज्यादा महसूस होना चाहिए लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं लगता. जिस मिशन पर ये फिल्म बनी है उसे आखिरी के कुछ मिनटों में समटे दिया गया. ऐसा लगा जैसे डायरेक्टर को जल्दी थी, या फिर उन्हें पहले के सीन ज्यादा अच्छे लग रहे हैं. कहानी का बिल्ड अप इतना लंबा और मिशन इतना छोटा सा और वो भी कुछ खास असर नहीं छोड़ता. कश्मीर एक इमोशन है और ये फिल्म आपको बिल्कुल इमोशनल नहीं करती, ना चौंकाती है, ना एंटरटेन करती है, ना कुछ फील करवाती है.

 

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एक्टिंग

इमरान हाशमी ने ठीक ठाक काम किया है, उन्होंने इस रोल में फिट होने की पूरी कोशिश की है. ये उनकी इमेज से उल्टा है लेकिन यही एक एक्टर को करना भी चाहिए कि अपनी इमेज से अलग कुछ करे. लेकिन कमजोर कहानी और स्क्रीन प्ले इमरान की मेहनत पर पानी फेर देते है. सई ताम्हणकर इमरान की पत्नी के किरदार में कुछ खास नहीं कर पाती. उन्हें कोई ऐसे खास सीन नहीं दिए गए जिसमें वो कुछ करके दिखा सकें. एक सीन आता है जब वो मीडिया के सामने कुछ कहती हैं, बस उसके अलावा वो कुछ नहीं करतीं. जोया हुसैन का किरदार ठीक से गढ़ा ही नहीं गया. मुकेश तिवारी भी बस बीएसएफ अफसर के रोल में डाल दिए गए कि एक अच्छा एक्टर चाहिए था.

 

 

डायरेक्शन और राइटिंग

Ground zero Reviewफिल्म को लिखा है संचित गुप्ता और प्रियदर्शी श्रीवास्तव ने और डायरेक्ट किया है तेजस प्रभा ने. इन तीनों ने इस फिल्म को ठीक से समझा ही नहीं. इन्होंने वही सब डाल दिया जो हम कई बार देख चुके हैं. जिस मिशन की बात थी उसे और अच्छे से दिखाना चाहिए था. स्क्रीनप्ले में जंप दिखते हैं, कहानी कहीं की कहीं पहुंच जाती है और फिल्म से डिस्कनेक्ट हो जाते हैं.

 

 

 

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