Asha Bhosle Funeral: पंचतत्व में विलीन हुईं आशा भोसले, राजकीय सम्मान के साथ हुई अंतिम विदाई – RGH NEWS
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Asha Bhosle Funeral: पंचतत्व में विलीन हुईं आशा भोसले, राजकीय सम्मान के साथ हुई अंतिम विदाई

Asha Bhosle Funeral अपनी अनूठी आवाज से हिंदी पार्श्व गायन में अलग मुकाम हासिल करने वालीं दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया. वह 92 वर्ष की थीं. आशा भोसले को शनिवार शाम को सीने में संक्रमण और कमजोरी के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार को किया गया. सुबह 11 बजे से उनका पार्थिव शरीर लोअर परेल स्थित कासा ग्रांडे में अंतिम श्रद्धांजलि के लिए रखा गया. फिर शाम करीब 5:15 बजे शिवाजी पार्क में किया गया. जहां पूरे राजकीय सम्मान और विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. ‘आशा ताई अमर रहें’ के गूंजते नारों के बीच उनके बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी. यह एक ऐसा क्षण था जब लगा मानो संगीत की दुनिया की धड़कन रुक गई हो. फिलहाल आशा ताई पंचतत्व में विलीन हो गई हैं.

 

 

सेलेब्स ने दी आशा भोसले को श्रद्धांजलि

आशा का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके मुंबई निवास कासा ग्रांडे में रखा गया था. आशा के अंतिम दर्शन के लिए सेलेब्स पहुंचे. आशा भोसले के अंतिम दर्शन के लिए रणवीर सिंह, तबु, राकेश रोशन, जौकी श्रॉफ, हेलेन, उदित नारायण, सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद सिरा, अनुराधा पौडवाल, रितेश देशमुख जैसे सितारे पहुंचे. आशा भोसले के जाने से उनके परिवारवाले टूट गए हैं. आशा की पोती जनाई भोसले का रो-रोकर बुरा हाल है. अंतिम दर्शन के दौरान सेलेब्स ने जनाई को हौंसला दिया और उन्हें शांत करवाया.

 

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स्वास्थ्य और अंतिम समय

आशा पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं. सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें 11 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. स्थिति बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन डॉक्टरों के काफी प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. डॉक्टरों ने पुष्टि की कि उनकी मृत्यु मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण हुई.

 

 

संघर्ष से सफलता का ऐतिहासिक सफर

Asha Bhosle Funeralबता दें कि आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को हुआ था. आशा भोसले ने बहुत कम उम्र से गाना शुरू कर दिया था. आशा भोंसले का जीवन मात्र सफलता की कहानी नहीं, बल्कि कड़े संघर्ष और अटूट इच्छाशक्ति की दास्तां है. उन्होंने अपना पहला गाना मराठी फिल्म के लिए अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ गाया था ‘चला चला नव बाल’. हालांकि, उन्हें असली पहचान 16 साल की उम्र में मिली, जब उन्होंने फिल्म ‘रात की रानी’ के लिए अपना पहला सोलो गाना रिकॉर्ड किया. उन्होंने हिंदी, बंगाली और मराठी सहित विभिन्न भाषाओं में 12000 से अधिक गानों को अपनी जादुई आवाज दी.

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