कितनी मिलावटी सब्ज़ियां खा रहे हैं आप ? ज़हर से बढ़ेगी इम्यूनिटी ? आप जानलेवा ज़हर तो नहीं खा रहे? ये भी देखिए कि आप देश में कहां हैं?

दिन भर के भोजन में अगर सबसे ज़्यादा और संतुलित पोषण आपको किसी चीज़ से मिलता है, तो वो सब्ज़ियां हैं. कोरोना वायरस के प्रकोप के समय में इम्यूनिटी पर ज़ोर दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ, सब्ज़ियों के इतने मिलावटी होने की खबर है कि आपके होश तक उड़ सकते हैं. जी हां, देश के प्रमुख राज्यों में जो सब्ज़ियां बेची जा रही हैं, उनमें 2 से लेकर 25 फीसदी तक ज़हरीली (Poisonous Vegetables) हैं यानी खाने लायक नहीं हैं. फिर भी आप अनजाने ही खा रहे हैं यानी आपकी सेहत के साथ बुरी तरह खिलवाड़ (Health Risks) हो रहा है.
भारत की खाद्य सुरक्षा एवं मानक अथॉरिटी (FSSAI) की एक हुआ है कि सीसे और कैडमियम जैसी खतरनाक धातुओं की निर्धारित मात्रा से दो से तीन गुना ज़्यादा तक सब्ज़ियों में पाई गई है. देश भर के बाज़ारों में बेची जा रही सब्ज़ियों में से कम से कम 9.5 फीसदी खाने लायक नहीं पाई गई हैं. राज्यों के हिसाब से भी आंकड़े सामने आए हैं और इसके पीछे की तस्वीर भी.
सब्ज़ियों की क्वालिटी चेक करने के लिए कई राज्यों से अलग अलग नमूने लिये गए थे, जिनमें से करीब 10 फीसदी नमूने फेल हो गए यानी खाने लायक नहीं पाए गए. मध्य प्रदेश से जो नमूने लिये गए, उनमें से 25 फीसदी जांच में फेल हो गए. यह सबसे खराब आंकड़ा रहा. दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ राज्य रहा, जिसके 13 फीसदी नमूने फेल पाए गए. इसके बाद बिहार, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, पंजाब और दिल्ली का नंबर रहा.
जी हां, आप ठीक समझ रहे हैं. इस अध्ययन के लिए देश को पांच ज़ोनों में बांटकर 3300 से ज़्यादा नमूने इकट्ठे किए गए थे. दक्षिण ज़ोन से जो नमूने लिये गए, सिर्फ वही जांच में पास हुए और उत्तर, पूर्व, पश्चिम और मध्य ज़ोन के नमूनों में से 306 नमूने फेल हो गए और 5 से 15 फीसदी तक ज़हरीले स्तर तक मिलावट पाई गई. 205 नमूनों में निर्धारित स्तर से ज़्यादा घातक मिलावट पाई गई.
कहां से आ रहा है सब्ज़ियों में ज़हर?
पत्ते वाली, फल वाली और ज़मीन के अंदर उगने वाली, FSSAI ने इन तीन किस्म की सब्ज़ियों के नमूने लेकर जांच की और जो रिपोर्ट तैयार की, उसमें साफ कहा गया कि सब्ज़ियों में हेवी मेटल्स की मात्रा कीटनाशकों के इस्तेमाल बढ़ने से बढ़ी है. साथ ही, सीवेज के गंदे पानी से सिंचाई होना और मिट्टी का खराब हो जाना अन्य कारण बताए गए हैं. FSSAI ने यह भी कहा है कि इस विषय पर बड़े स्तर पर स्टडी की ज़रूरत है.



