*✍️जाने IAS और IPS अफसर किसकी पावर है सबसे ज्यादा….सैलरी से लेकर सरकारी सुविधाओं में ये है अंतर….*

यूपीएससी की तैयारी भले कितनी भी कठिन और मुश्किल हो लेकिन इसका चार्म देश के हर नागरिक को प्रभावित करता है। परीक्षा पास करने के बाद कैंडिडेट्स को अफसर बनने की ट्रेनिंग पर भेजा जाता है। अखिल भारतीय सेवाओं में हम सभी जानते हैं कि IAS तथा IPS अधिकारी दोनों ही पद एक जिले के सबसे महत्वपूर्ण पद होते हैं। IAS और IPS एक दूसरे के पूरक हैं, दोनों ही भारतीय समाज के विकास के लिए आवश्यक हैं। दोनों पद की अपनी ही गरिमा हैं। एक सादे कपड़ों में अफसर तो दूसरा पुलिस की वर्दी वाला सच्चा सेवक।
दोनों ही श्रेष्ट पद हैं लेकिन IAS बनना उम्मीदवारों की पहली पसंद होती है। पर बहुत लोग ऐसे भी हैं जिनको पुलिस की वर्दी आकर्षित करती है तो वो IPS बनना पसंद करते हैं। एक जिले में एक से ज्यादा IAS तथा IPS तैनात होते हैं परन्तु सबसे important पद जिले के DM तथा SSP के होते हैं।
IAS तथा IPS दोनों का ही चयन UPSC की सिविल सेवा परीक्षा के द्वारा किया जाता है। aspirants अपनी पसंद की सर्विस preference, UPSC के Detailed Application फॉर्म (DAF) में भर देते हैं तथा फाइनल रिजल्ट में अपनी रैंक के अनुसार उन्हें सर्विस प्रदान कर दी जाती है। Indian Administrative Service ज्वाइन करने के बाद, अभ्यर्थी सिविल सेवा की परीक्षा नहीं दे सकता परन्तु IPS बनने के बाद सिविल सेवा की परीक्षा दे सकता है।
कैडर कंट्रोल अथॉरिटी
IAS तथा IPS दोनों ही ALL India Services हैं लेकिन दोनों की Cadre Controlling Authority अलग अलग हैं। IAS की Cadre Controlling Authority, Ministry of Personnel होती है जो की सीधे प्रधान मंत्री के आधीन होता है परन्तु IPS की Cadre Controlling Authority Home Ministry होती है जो की गृह मंत्री के आधीन होती है।
ट्रेनिंग
IAS तथा IPS की शुरुवाती 3 महीने की training जिसे foundation कोर्स भी कहते है, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी(LBSNAA) में ही होती है। उसके बाद IPS प्रशिक्षुओं को सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) हैदराबाद भेज दिया जाता है जहाँ वे अपनी पुलिस training लेते हैं।
IAS Training में टॉप करने वाले candidates को Medal तथा IPS Training में टॉप करने वाले candidate को Sword of Honour दिया जाता है। तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो IPS की training ज्यादा कठिन होती है तथा ज्यादा परिश्रम की अपेक्षा करती है। इसमें घुड़सवारी, परेड, शस्त्र विद्या इत्यादि शामिल होता है।
पावर और जिम्मेदारियां
IAS तथा IPS दोनों ही सेवाओं का जॉब प्रोफाइल बहुत ही Broad होता है और दोनों ही बहुत Powerful Posts पर तैनात होते है परन्तु IAS, एक डीएम के रूप में काफी ज्यादा Powerful होता है। एक IPS के पास केवल अपने विभाग की जिम्मेदारी होती है परन्तु एक IAS (डीएम) के पास District के सभी departments की जिम्मेदारी होती है। डीएम के रूप में एक IAS अधिकारी, पुलिस विभाग के साथ साथ अन्य विभागों का भी मुखिया होता है।
डिस्ट्रिक्ट की पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी भी DM के पास ही होती है। शहर में curfew, धारा 144 इत्यादि Law and Order से जुड़े सभी Decision DM ही लेता है। भीड़ पर Firing का आर्डर भी DM ही दे सकता है। IPS भीड़ पर Firing का आर्डर नहीं दे सकता। इतना ही नहीं पुलिस Officers के tranfers के लिए भी DM के Approval की आवश्यकता होती है।
स्कोप ऑफ़ ड्यूटी
DM के रूप में एक IAS अधिकारी का स्कोप ऑफ़ ड्यूटी district के सभी departments में होता है। एक IPS, SSP रहते हुए सिर्फ अपने पुलिस विभाग तथा यातायात विभाग में ही कार्य कर सकता है। डीएम का कार्य क्षेत्र land records, revenue, Law n Order, agriculture इत्यादि district के सभी department होते हैं।
सैलरी
भारत में IPS अधिकारी का वेतन सातवें वेतन आयोग की recommendations के बाद से काफी बेहतर हुआ है । IPS का वेतन 56,100 रुपये प्रति माह से लेकर 2,25,000 रुपये प्रति माह तक हो सकता है। यह Seniority के आधार पर अलग अलग होता है। IAS की Salary भी सातवें वेतन आयोग की recommendations काफी बेहतर हो गया है। IAS का वेतन 56,100 रुपये प्रति माह से लेकर 2,50,000 रुपये प्रति माह तक हो सकता है। यह भी Seniority के आधार पर अलग अलग होता है। IAS की salary IPS से ज्यादा होती है। इसके अलावा दोनों अफसरों को सरकारी आवास, गाड़ी आदि की सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं। वहीं बिजली-पानी मेडिकल आदि के खर्च के भुगतान में छूट मिलती है।



