मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हारी…….पहले 1200 वोटों से ममता की जीत का ऐलान, फिर 1622 वोटों से हराने का भाजपा का दावा,हार के बाद बोली दीदी….

नंदीग्राम पश्चिम बंगाल में टीएमसी रुझानों में 200 से ऊपर सीटों पर जीतती दिख रही है लेकिन इस प्रचंड बहुमत के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अपनी सीट नहीं बचा पाईं। नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी के हाथों उन्हें 1953 वोटों से शिकस्त झेलनी पड़ी है। ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में अपनी हार स्वीकार कर ली है।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने जीत के बाद कहा, ‘हम कोई जश्न नहीं मनाएंगे. हमें कोरोना से लड़ना है. बंगाल में फ्री वैक्सीन देंगे. बंगाल के लोगों की जीत हुई है. मुझे डबल सेंचुरी की उम्मीद थी. फ्री वैक्सीन के लिए केंद्र के खिलाफ धरना दूंगी.’
आपको बता दें कि ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हार का सामना करना पड़ा है. शुभेंदु अधिकारी को 1953 वोटों से जीत मिली है।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद सीएम ममता बनर्जी ने कहा, ‘मैं सभी को धन्यवाद देना चाहूंगी. मैं सभी से विनती करती हूं कि विजय जुलूस न निकालें. मैं सभी से अपने घरों में वापस जाने का आग्रह करती हूं. मैं शाम 6 बजे के बाद मीडिया को संबोधित करूंगी.’
नंदीग्राम में खेला और झमेला
इन पांचों राज्यों के नतीजों पर अकेली नंदीग्राम सीट का फैसला भारी पड़ गया। ‘खेला’ और झमेला भी यहीं होता दिखा। बंगाल की इस सीट से खुद सीएम ममता बनर्जी मैदान में थीं। उनका मुकाबला अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में गए शुभेंदु अधिकारी से था।
शाम साढ़े चार बजे खबर आई कि नंदीग्राम में ममता 1200 वोटों से जीत गई हैं, लेकिन करीब डेढ़ घंटे बाद शाम 6 बजे भाजपा की IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि ममता जीती नहीं, बल्कि 1,622 वोटों से हार गई हैं। उधर, चुनाव आयोग की वेबसाइट अलग ही आंकड़े बताती रही। रात 9:30 बजे की स्थिति के मुताबिक, ममता इस सीट से अभी शुभेंदु से 1,453 वोटों से पीछे हैं।
बंगाल के पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा इसी सीट की रही। तृणमूल छोड़कर भाजपा में आए शुभेंदु ने कहा था कि वे 50 हजार वोटों से जीतेंगे और अगर हार गए तो राजनीति छोड़ देंगे।
क्या ममता ने भी हार कबूल की?
ममता के बयान से जाहिर हो रहा है कि नंदीग्राम में उनकी हार हुई है। कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता ने कहा कि नंदीग्राम के बारे में फिक्र मत करिए। मैंने नंदीग्राम के लिए संघर्ष किया। वहां के लोग जो भी तय करते हैं, मैं उसे स्वीकार करती हूं।



