कॉलेज में जाकर नहीं दे सकते उत्तरपुस्तिका पोस्ट करना जरूरी है, घंटों लगी रही कतार...कोरोना के खतरे के बीच सोशल डिस्टेंसिंग भूल खड़े रहे सैकड़ों विद्यार्थी – RGH NEWS
रायगढ़ न्यूज़ (समाचार)

कॉलेज में जाकर नहीं दे सकते उत्तरपुस्तिका पोस्ट करना जरूरी है, घंटों लगी रही कतार…कोरोना के खतरे के बीच सोशल डिस्टेंसिंग भूल खड़े रहे सैकड़ों विद्यार्थी

RGH NEWS प्रशांत तिवारी कॉलेजों में अंतिम वर्ष और प्राइवेट विद्यार्थी कोरोना काल में घर में बैठकर परीक्षा लिख रहे हैं। परीक्षा के बाद उत्तरपुस्तिका कॉलेज जाकर नहीं दे सकते बल्कि रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए भेजनी है। भेजने का इंतजाम डाकघर में है। गुरुवार को रेलवे स्टेशन के बाहर आरएमएस काउंटर और मुख्य डाकघर पर लगभग एक किलोमीटर लंबी कतार लगी थी। विद्यार्थी मास्क तो लगाए रहे लेकिन मजबूरी में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर सके। दोनों जगह एक-एक काउंटर चलते रहे। कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए ही 15 दिन पहले जब उत्तर पुस्तिकाओं को जमा करने के लिए स्टूडेंट्स कॉलेजों में आने लगे थे और वहां भीड़ जुटने लगी तो एग्जाम के बाद पांच दिन के भीतर उत्तरपुस्तिकाओं को रजिस्टर्ड डाक या स्पीड पोस्ट से भेजने के लिए कहा गया है। जिले में लॉकडाउन था इसलिए अटल विश्वविद्यालय ने अनलॉक होते ही कॉपी भेजने के लिए कहा था। गुरुवार को जैसे ही शहर और जिला अनलॉक हुआ ऐसी भीड़ लग गई। सुबह से ही महिला, लड़कियां, लड़के अपने परिजन के साथ आए और लिफाफा लेकर कतार में लग गए। कॉलेज के विद्यार्थियों की भीड़ स्टेशन चौक स्थित मुख्य डाक घर में आ गई। डाकघर और आरएमएस प्रबंधन भीड़ को लेकर पूरी तरह बेखबर दिखा। ग्रामीण इलाके और शहर के स्टूडेंट्स भी मुख्य डाक घर में उत्तरपुस्तिकाओं को भेजने के लिए पहुंच गए। जूटमिल, कलेक्टोरेट, रेलवे स्टेशन, लाल टंकी के सामने, जेएसपीएल पतरापाली पोस्ट ऑफिस से भी कॉपी भेजी जा सकती है।

4 पोस्टमेन पॉजिटिव आए तो डाकघर बंद किया
मुख्य डाक घर में गुरुवार को चार पोस्टमेन संक्रमित हो गए हैं। इसके बाद डाक विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए मुख्य डाक घर को बंद रखने का निर्णय लिया है। शुक्रवार से रविवार तक डाक घर बंद रहेगा। गुरुवार को इस डाकघर में अधिक भीड़ होने के बाद दोपहर डेढ़ बजे के बाद डाक रिसीव करने के लिए दूसरा काउंटर खोला गया।

सरोकार नहीं दिखा डाकघरों में आरएमएस और मुख्य डाकघर में दोपहर तक अफसर पंखे के नीचे बैठ हवा खाते रहे। दोनों जगह लंबी लाइन लगी रही लेकिन एक-एक काउंटर पर डाक ली जाती रही। कोरोना का खतरा है। दुकान, सड़कों पर भीड़ न करने की सलाह दी गई है लेकिन डाकघर के अफसर संक्रमण के खतरे से बेखबर दिखे। किसी अफसर ने यह नहीं सोचा कि काउंटर बढ़ा दें। कुछ स्टूडेंट्स शोर मचाने लगे तो मुख्य डाकघर में दोपहर बाद एक काउंटर बढ़ाया गया। किसी अफसर ने विद्यार्थियों से दूसरे डाकघर में इंतजाम की बात भी नहीं बताई।

दूसरे डाकघरों में भी हैं इंतजाम
“शहर में पांच जगहों में डाकघर और उप डाकघर हैं। वहां से भी स्टूडेंट्स स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड डाक से उत्तरपुस्तिकाओं को भेज सकते हैं, हर ब्लॉक मुख्यालयों के डाक घर है, स्टूडेंट्स एक जगह ना आएं, किसी भी पोस्ट ऑफिस में डाक दे सकते हैं। शुक्रवार को गांधी जयंती होने की वजह छुट्‌टी है।”
-एलएन महतो, अधीक्षक, डाकघर

स्टूडेंट्स धैर्य रखें, 5 दिन का समय है
“कॉलेजों में भीड़ बहुत हो रही थी, पोस्ट ऑफिस में डाक के माध्यम से उत्तरपुस्तिका भेजने के लिए कहा है। स्टूडेंट्स हड़बड़ी ना करें। वे आराम से पांच दिनों में डाक भेज सकते हैं। यदि भीड़ होती है तो डाक कर्मचारी स्थानीय प्रशासन और पुलिस से मदद लेकर सोशल डिस्टेंसिंग पालन करते हुए डाक लें। ऐसी व्यवस्था हमने बिलासपुर में बनाई है। वहां पालन करना चाहिए।”
-प्रो सुधीर शर्मा, रजिस्ट्रार, अटल विश्वविद्यालय

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