Loan Rates: इन 2 बड़े सरकारी बैंकों ने बढ़ा दी ब्याज दरें, होम से लेकर कार लोन तक होगा महंगा
Loan Rates सार्वजनिक क्षेत्र के दो प्रमुख बैंकों, Canara Bank और Bank of Baroda ने अपनी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate (MCLR) में बढ़ोतरी की घोषणा की है. नई दरें 12 जून 2026 से प्रभावी होंगी. MCLR में वृद्धि से होम लोन, ऑटो लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्जों की ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है. पढ़ें कितनी हुई है दरों में बढ़ोतरी
एक महीने की MCLR 7.90% से बढ़कर 7.95% हो गई है.
तीन महीने की MCLR 8.15% से बढ़कर 8.20% कर दी गई है.
छह महीने की MCLR 8.45% से बढ़ाकर 8.50% की गई है.
एक वर्ष की MCLR 8.70% से बढ़कर 8.75% हो गई है.
Canara Bank
बैंक ने 6 महीने तक के टेन्योर की एमसीएलआर में बढ़ोतरी की है
Overnight MCLR को 7.90% से बढ़ाकर 7.95% कर दिया है.
एक महीने की MCLR 7.95% से बढ़कर 8.00% हो गई है.
तीन महीने की MCLR 8.20% से बढ़कर 8.25% कर दी गई है.
छह महीने की MCLR 8.55% से बढ़कर 8.60% हो गई है.
हालांकि, एक वर्ष की MCLR 8.75% पर अपरिवर्तित रखी गई है.
दो वर्ष की MCLR 9.00% पर यथावत है.
तीन वर्ष की MCLR भी 9.05% पर बरकरार रखी गई है.
MCLR क्या है?
MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) वह न्यूनतम दर होती है जिस पर बैंक अधिकांश प्रकार के कर्ज प्रदान करते हैं. इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2016 में लागू किया था ताकि मौद्रिक नीति में बदलाव का प्रभाव ग्राहकों तक तेजी से पहुंच सके.
Loan Ratesबैंक अपनी फंडिंग लागत, जमा पर ब्याज, परिचालन लागत और ऋण अवधि जैसे कारकों के आधार पर MCLR तय करते हैं. जब MCLR बढ़ती है तो इससे जुड़े फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज महंगे हो सकते हैं और उधारकर्ताओं की EMI बढ़ सकती है. वहीं MCLR घटने पर कर्ज सस्ता हो सकता है. बैंकों के इस कदम को बाजार में ब्याज दरों और फंडिंग लागत में हो रहे बदलावों के अनुरूप माना जा रहा है.
(डिस्क्लेमर: ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार हैं, वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके प्रति जिम्मेदार नहीं है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या सर्टिफाइड एक्सपर्ट से राय जरूर लें.)



