Vande Bharat Train Accident: वंदे भारत ट्रेन की चपेट में आने से पति-पत्नी और बच्ची की मौत, ट्रैक पार करने के दौरान हुआ हादसा

Vande Bharat Train Accident पाकुड़-रामपुरहाट रेलखंड के बीच मंगलवार की देर रात एक भीषण रेल हादसा हो गया। नवीनगर (नगरनबी) स्टेशन के समीप रेलवे ट्रैक पार करते समय पति-पत्नी और उनकी मासूम बच्ची वंदे भारत एक्सप्रेस की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
घटना मंगलवार रात की है, जब न्यू जलपाईगुड़ी से हावड़ा की ओर जा रही 22302 न्यू जलपाईगुड़ी-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस तेज रफ्तार में नगरनबी स्टेशन के पास से गुजर रही थी। उसी समय यह परिवार रेलवे ट्रैक पार करने की कोशिश कर रहा था। अंधेरा और स्पीड में ट्रेन होने के कारण उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला और तीनों ट्रेन की चपेट में आ गए।
मृतकों की पहचान
रेलवे पुलिस (GRP) ने घटनास्थल पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया। जांच के बाद मृतकों की शिनाख्त राजा पाड़ा निवासी के रूप में हुई है।
चंदन सरदार (35 वर्ष): पति
रिम्पा (25 वर्ष): पत्नी
अर्पिता: मासूम बेटी
रमेश किस्कू, सब-इंस्पेक्टर, GRP ने बताया, “हमने तीनों शवों को कब्जे में ले लिया है और उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा रहा है। मामले की छानबीन जारी है।”
वंदे भारत एक्सप्रेस के बारे में
वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की अपनी आधुनिक और सुपरफास्ट ट्रेन है, जिसे पूरी तरह भारत में ही बनाया गया है। इसे मेक इन इंडिया का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है, क्योंकि इसका इंजन अलग से नहीं होता, बल्कि पूरी ट्रेन एक सेट की तरह काम करती है, जिससे यह बहुत जल्दी रफ्तार पकड़ लेती है।
वंदे भारत की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार है, जो ट्रैक के हिसाब से 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा सकती है। इसके अंदर की सुविधाएं हवाई जहाज जैसी होती हैं, जैसे कि घूमने वाली सीटें, सेंसर वाले दरवाजे, वाई-फाई और बायो-टॉयलेट। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसमें ‘कवच’ नाम की तकनीक लगी है, जो दो ट्रेनों को आपस में टकराने से बचाती है।
Vande Bharat Train Accidentभारत में अभी तक कुल 82 वंदे भारत ट्रेनें (यानी आने-जाने की 164 सेवाएं) चल रही हैं। पहली वंदे भारत ट्रेन साल 2019 में दिल्ली से वाराणसी के बीच शुरू हुई थी, लेकिन अब यह देश के लगभग हर बड़े राज्य और शहर को जोड़ चुकी है। अब सरकार ऐसी स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें भी ला रही है, जिनमें यात्री रात में सोकर लंबा सफर तय कर सकेंगे। रेलवे का लक्ष्य आने वाले कुछ सालों में इनकी संख्या को 800 तक ले जाने का है।



