*✍️कोरोना का समय पर इलाज न मिलने के कारण कुछ मरीजों की निकालनी पड़ रही है आंखे…फंगल इंफेक्शन का बढ़ रहा खतरा यह अबतक 8 लोगों की निकालनी पड़ी आंख…*

देश में एक ओर जहां कोरोना के संक्रमण ने कोहराम मचा रखा है वहीं कोरोना से मरीजों के लिए एक और खतरा सामने खड़ा हो गया है। कोरोना का समय पर इलाज न मिलने के कारण कुछ मरीजों की आंख तक निकालनी पड़ रही है। कोरोना के बाद मरीजों में म्यूकोरमाइसिस, का खतरा इतना बढ़ गया है कि मरीजों की मौत तक हो जा रही है। सूरत में 15 दिनों के अंदर ऐसे 40 से अधिक केस सामने आए हैं, जिनमें 8 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ी हैं।देश में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या गुजरात में तेजी से बढ़ रही है। मरीजों को न तो बेड मिल रहा है न ही ऑक्सीन। स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं, जिसके चलते कोरोना मरीज अस्पताल के बाहर ही दम तोड़ रहे हैं। इसी बीच अब लोगों को एक नई बीमारी ने अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। ये बीमारी इतनी खतरनाक है कि समय पर इसका इलाज न होने पर मरीज की आंख निकालनी पड़ती है या फिर उसकी मौत हो जाती है। इस नई बीमारी का नाम मिकोर माइकोसिस बताया जा रहा है।
डाक्टरों की मानें तो म्यूकोरमाइसिस एक प्रकार का फंगल इंफेक्शन है, जो नाक और आंख से होता हुआ ब्रेन तक पहुंच जाता है और मरीज की मौत हो जाती है। पिछले साल कोरोना के पहले फेज में इस बीमारी के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई थी लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में इस तरह के केस बढ़ते जा रहे हैं। पहले कोरोना मरीज आंख दर्द और सिर दर्द को हल्के में ले रहे थे लेकिन इस बार इसका असर काफी ज्यादा देखा जा रहा है।
वैसे तो कोरोना के पहले फेज में इस बीमारी के बारे में बहुत जानकारी नहीं मिल पाई थी। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में इसके केस अधिक सामने आ रहे हैं। कोरोना से संक्रमित होने के बाद मरीज आंख दर्द, सिर दर्द आदि को इग्नोर करता है। यह लापरवाही मरीज को भारी पड़ती है। शहर के किरण हॉस्पिटल में ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर संकेत शाह बताते हैं कि कोरोना ठीक होने के बाद यह फंगल इंफेक्शन पहले साइनस में होता है और 2 से 4 दिन में आंख तक पहुंच जाता है।



