*✍️किसानों के पौधे और रुपए खा गए उद्यान विभाग के अधिकारी पढ़ें पूरी खबर✍️*

RGHNEWS प्रशांत तिवारी उद्यान विभाग रायगढ़ के कुछ अधिकारियों की ओर से किसानों के लिए बनाई गई योजनाओं की रकम और उनका हक डकारने की परंपरा नई नहीं है। अपने इस परंपरा का बखूबी निर्वहन करते हुए इस बार भी इस विभाग के अधिकारियों ने किसानों को मिलने वाले बीज खाद और रकम बड़ी सफाई के साथ हजम कर गए हैं वह भी जिला प्रशासन के नाक के नीचे।
किसानों ने पंचनामा बनाकर किया विभाग के अधिकारियों के फर्जीवाड़े का खुलासा
किसानों की ओर से विभाग के अधिकारियों का फर्जीवाड़ा उजागर करने के लिए बकायदा पंचनामा में विभागीय अधिकारियों की ओर से पौधों की चोरी करने की बात लिखी है। किसानों ने बताया कि उन्हें कुछ पौधे गर्मी में दे दिये गये हैं लेकिन इन पौधों को कैसे लगाया जाना है, इसकी कोई जानकारी विभागीय अधिकारियों द्वारा नहीं दी गयी है।
किसानों ने कुछ मात्रा में मिले पौधों को वे रखें हैं। जिसे वे बाद में लगायेगें। यह बात भी देखने वाली है कि जितना पौधे दिये गये हैं वे अपने पूरे खेतो में कैसे लगा पायेगें। अमूमन ऐसा ही हाल रायगढ़ जिले के अधिकांश गांवों का है जिसका खुलासा हम क्रमश: करते रहेंगे।
सरकारी दस्तावेजों में जितना दिया उतना नहीं मिला किसान को
सबसे अहम बात है कि राष्ट्रीय बागवानी योजना के तहत उद्यान विभाग की ओर से क्षेत्र के किसानों को कई प्रजातियों के पौधों का वितरण करना बताया गया है, लेकिन जितनी मात्रा में वितरण बताया गया है उतना किसानों को मिला ही नहीं है इस बात की पुष्टि स्वयं किसान कर रहे हैं। रायगढ़ से लगे हुए ग्राम साल्हेओना की बात करें तो यहां के किसान कालिया राम प्रधान को 1/2 हेक्टेयर जमीन में काजू लगाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में 95 नग काजू के पौधे देना बताया गया है जबकि किसान का कहना है कि उसे केवल 40 से 50 पौधे ही दिए गए। इसी गांव के एक अन्य किसान सुबरन चौहान को1/2 हेक्टेयर खेत में 166 नग ड्रैगन फ्रूट के पौधे रिकॉर्ड में लिखकर महज 30 से 50 पौधे ही दिए गए इसी प्रकार रजनीगंधा के पौधे1/2 हेक्टेयर में लगाने के लिए ३७6०० पौधे दिया जाना बताया गया जबकि किसान ने न तो इतनी भूमि में रजनीगंधा के पौधे लगवाए और ना ही उसे इतने दिए गए किसान ने बताया कि उसने केवल 2 डिसमिल जमीन पर ही रजनीगंधा के पौधे लगाए हैं उसे उद्यान विभाग की ओर से एक बोरी रजनीगंधा के पौधे दिए गए थे जोकि रिकॉर्ड में लिखी हुई मात्रा से काफी कम है। इसी किसान को 1 हेक्टेयर भूमि में काजू के पौधे लगाने के लिए रिकॉर्ड में 190 नग पौधे देना बताया गया है जबकि किसान को महज 120 नग काजू के पौधे ही दिए गए। खास बात यह है कि एक तो कम मात्रा में किसानों को देकर बाकी पौधों का वारा न्यारा कर दिया गया।



