राहुल द्रविड़ और पारी घोषित करने के 3 विवाद – RGH NEWS
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राहुल द्रविड़ और पारी घोषित करने के 3 विवाद

नई दिल्ली. भारत कानपुर टेस्ट (Kanpur Test) में सिर्फ एक विकेट से जीत से दूर रह गया. इसके बाद सबसे ज्यादा बहस इस बात पर हुई कि क्या टीम इंडिया (Team India) ने पारी घोषित करने में देरी कर दी थी? इस बहस के केंद्र में कप्तान अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) से ज्यादा कोच राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) थे. दिलचस्प बात यह कि जो राहुल द्रविड़ विवादों से दूर रहने के लिए जाने जाते हैं, वो पारी घोषित संबंधी बहस होने पर अक्सर केंद्र में आ जाते हैं. अपने खेल में निरंतरता के लिए मशहूर रहे द्रविड़ के विचार पारी घोषित करने में बदलते जाते हैं. कानपुर में खेले गए भारत-न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) टेस्ट मैच में भी यही हुआ.

सचिन तेंदुलकर तक ने अपनी बायोग्राफी में

राहुल द्रविड़ के ऐसे फैसले का विस्तार से जिक्र किया है. 100 शतक लगाने वाले सचिन तेंदुलकर ने यह समझाने की कोशिश की है कि द्रविड़ ने कैसे और क्या गलती की. हम यहां ऐसे तीन मैचों का जिक्र कर रहे हैं, जब द्रविड़ खिलाड़ी, कप्तान और कोच के तौर पर पारी घोषित करने के फैसले में शामिल रहे और उनकी सोच बदलती रही. इन तीन में से भारत एक ही मैच जीत पाया

3 दिग्गजों ने माना कानपुर में हुई देरी
सबसे पहले कानपुर टेस्ट मैच की बात, जो राहुल द्रविड़ के लिए बतौर कोच पहला टेस्ट मैच भी था. भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ इस मैच के चौथे दिन तब पारी घोषित की, जब सिर्फ 4 ओवर का खेल बाकी था. इस कारण भारत को आखिरी ओवर में 98 ओवर की गेंदबाजी का मौका ही मिल पाया. भारत ने इस दौरान न्यूजीलैंड के 9 विकेट झटके, लेकिन आखिरी जोड़ी नहीं तोड़ पाया. इसके बाद से ही यह बहस जोरों पर रही कि क्या भारत ने देर से पारी घोषित की. मैच के दौरान और बाद में भी स्टार स्पोर्ट्स पर कमेंट्री कर रहे वीवीएस लक्ष्मण, इरफान पठान और आकाश चोपड़ा तीनों ही इस बात पर सहमत थे कि भारत ने देरी कर दी है. इरफान पठान ने तो यहां तक कहा कि अगर विराट कोहली कप्तान होते तो शायद वो और पहले पारी घोषित करते ताकि गेंदबाजों को विकेट लेने का ज्यादा वक्त मिल पाता.

पाकिस्तान में जब सचिन 194 पर नाबाद थे, तब घोषित की थी पारी
पारी घोषित करने संबंधी सबसे बड़ा विवाद 2004 का याद आता है, जब राहुल द्रविड़ कप्तान थे. भारत ने इस मैच के दूसरे दिन तब पारी घोषित कर दी थी जब सचिन तेंदुलकर 194 रन पर नाबाद थे. इस पर सचिन ने नाराजगी भी जताई थी, जिन्हें दोहरे शतक से वंचित कर दिया गया था. सचिन ने इस मैच का जिक्र अपनी बायोग्राफी ‘प्लेइंग इन माय वे’ में किया है. सचिन के मुताबिक, ‘टीब्रेक के बाद जब मैंने ड्रेसिंग रूम में पारी घोषित करने के बारे में पूछा तो मुझे बताया गया कि जब दिन में 15 ओवर का खेल बचेगा तब ऐसा किया जाएगा. लेकिन सिर्फ आधे घंटे बाद ही मुझे तेज खेलने का मैसेज किया गया. कुछ देर बाद फिर मैसेज आया कि इसी ओवर में दोहरा शतक पूरा करना है क्योंकि द्रविड़ पारी घोषित करने का फैसला ले चुके हैं. उस वक्त भी मेरे हिसाब से हमारे पास 12 गेंद बाकी थी. लेकिन संयोग देखिए कि उस ओवर में मेरी बैटिंग ही नहीं आई.

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