BJP का विधानसभा थाने में हाईवोल्टेज ड्रामा

RGHNEWS PRASHANT TIWARI केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को माना बस्ती के पास काले झंडे दिखाने की घटना शनिवार रात तक बड़ा राजनीतिक बवाल बन गई, मारपीट हुई। पुलिस कर्मियों से बदसलूकी हुई। आरोपियों को छुड़ाने के लिए भाजपा नेताओं ने विधानसभा थाने का घेराव कर लगभग उस पर कब्जा ही कर लिया। इस दौरान पुलिस समझौता करने की कोशिश में ही जुटी रही। अब भाजपा ने इस मामले में साइबर सेल प्रभारी पर कार्रवाई की मांग लेकर आंदोलन की घोषणा की है।
बवाल की शुरुआत शनिवार शाम 4 बजे हुआ जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंत्री रुद्र गुरु के बंगले के सामने खड़े मुंगेली से आए तीन-चार युवकों को पीट दिया। आरोप है कि वे लोग केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को काले झंडे दिखा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है, उनमें से कोई काला झंडा नहीं दिखा रहा था बल्कि एक ने काले-सफेद रंग का कुर्ता और एक ने काली जैकेट पहनी थी। उनकी शिकायत पर पुलिस ने शुभांकर द्विवेदी, राहुल राव सहित कई कार्यकर्ता के खिलाफ FIR दर्ज की।
उसके बाद भाजपा के दो कार्यकर्ताओं को पकड़ा तो पूर्व मंत्री राजेश मूणत पुलिस अफसरों से बदसलूकी पर उतर आए। विवाद टालने के चक्कर में पुलिस आरोपियों को लेकर चली तो राजेश मूणत भी पुलिस की गाड़ी में ही सवार हो गए। पुलिस सूत्रों ने बताया, बवाल की आशंका को देखते हुए उन्हें शहर से दूर किसी थाने में ले जाने की कोशिश हो रही थी। विधानसभा थाने को पार करता देख मूणत चिल्लाने लगे और गाड़ी से कूदने की धमकी दी।
उसके बाद पुलिस ने सभी को विधानसभा थाने में बैठा लिया। यहां से मूणत ने एक वीडियो जारी कर खुद के साथ मारपीट का आरोप लगाया। उनका कहना था, सादी वर्दी में आए चार लोगों ने कार्यकर्ता को मारापीटा। उनको भी सिर पर मारा और मोबाइल छीन लिया। इसके बाद वहां भाजपा के शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ने लगी। रात में चार घंटे से अधिक समय तक विधानसभा थाना भाजपा नेताओं के कब्जे में था।
थाने में भी पुलिसकर्मी से मारपीट की कोशिश
भाजपा कार्यकर्ताओं ने थाने में भी साइबर सेल के प्रभारी गिरीश तिवारी से मारपीट की कोशिश की। उसको पकड़ा-धक्के दिए। थाने की पुलिस ने उनको किसी तरह से वहां से सुरक्षित निकाला। जैसे-जैसे रात बढ़ी थाने में भीड़ बढ़ती गई। रात तक थाने के भीतर-बाहर भाजपा के हजारों कार्यकर्ता जमा हो चुके थे।
अपने ही नेताओं पर भड़के मूणत
थाने के बाहर नारेबाजी होती रही। भीतर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व विधायक और भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी, सांसद रामविचार नेताम जैसे नेता एसएसपी से बात कर रहे थे। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, आप ज्ञापन लीजिए, राज्यपाल के नाम हम ज्ञापन दे रहे हैं, उसी के साथ कार्यवाही भी कीजिए।’ बात पूरी होने से पहले ही वहां मौजूद राजेश मूणत भड़क गए। कहा, “यह सब नहीं चलेगा, यह सब मिलाजुला मसला है। मैं बिलकुल नही मानूंगा। मैंने प्रदेश को बता दिया है, मैंने राष्ट्रीय संगठन को भी बता दिया है। बिलकुल बगैर कार्यवाही कोई बात नहीं सुनूंगा। उसके बाद मूणत फिर थाने के बरामदे में बैठ गए।
रमन सिंह और विष्णुदेव साय भी पहुंचे
रात 8.15 बजे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय भी विधानसभा थाने पहुंच गए थे। एसएसपी के साथ उनकी लंबी बातचीत चली। भाजपा नेता उसी बात पर अड़े हुए थे कि पूर्व मंत्री के साथ मारपीट के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए। पुलिस वालों का कहना था, पूर्व मंत्री के साथ ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है। पुलिस ने मारपीट और बदसलूकी के फुटेज दिखाए। भाजपा नेताओं का आरोप था, कि पुलिस आधे-अधूरे फुटेज दिखाकर घटना को छिपा रही है।
आज राजभवन तक मार्च की घोषणा
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा, पुलिस मर्यादा की सीमा पार कर गई। फैसला हुआ है कि आंदोलन जारी रहेगा। जब तक थानेदार पर कार्रवाई नहीं हो जाती, थाने के अंदर धरना होगा। पुलिस चाहे तो हमें अरेस्ट कर लें। अरेस्ट करेगी तो फिर दूसरे लोग उनकी जगह लेने आएंगे। रविवार को राजभवन तक मार्च कर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो सोमवार को रायपुर बंद कराया जाएगा।



