*✍️मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दी गयी चुनौती- ईद हुई है छठ भी होगी, मौलाना केजरीवाल परमिशन दे या न दे…..*

राजधानी दिल्ली में इस बार भी लोगों को सार्वजनिक तौर पर छठ पूजा मनाने की अनुमति नहीं होगी। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) द्वारा यह रोक लगाई गई है। इसको लेकर आदेश जारी करते हुए कहा गया है कि कोरोना के मामलों में भले ही गिरावट देखी जा रही है लेकिन त्योहारों के सीजन में संक्रमण के फैलने की आशंका बढ़ जाती है, ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर पूजा करने का जोखिम नहीं लिया जा सकता है। आदेश के अनुसार सार्वजनिक स्थानों, मैदानों और मंदिरों में कार्यक्रमों पर भी पाबंदी रहेगी। DDMA का यह आदेश 15 नवंबर तक लागू रहेगा। DDMA के आदेश के अनुसार त्योहारों के सीजन में दिल्ली में मेले के आयोजन, फूड स्टॉल, झूला लगाना या रैली निकालने की भी अनुमति नहीं होगी। किसी भी सार्वजनिक जगह पर उत्सवों के आयोजनों की अनुमति नहीं होगी दिल्ली में उत्सवों के आयोजनों में खड़े होने या जमीन पर बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी, सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हुए केवल कुर्सियों पर बैठने की अनुमति होगी। प्राधिकरण ने लोगों को सलाह दी है कि वह अपने घर पर ही सुरक्षित तरीके से छठ पूजा मनाएँ।
इस आदेश के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में बीजेपी नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनौती देते हुए कहा है कि ईद हुई है छठ भी होगी, चाहे मौलाना केजरीवाल परमिशन दे या न दे। चैलेंज है।
उन्होंने कहा, “अभी-अभी अरविंद केजरीवाल जी ने ऐलान किया है कि इस बार दिल्ली के अंदर छठ मनाने की परमिशन नहीं दी जाएगी। जबकि ईद के समय लॉकडाउन चल रहा था, फिर भी सारे के सारे बाजार खुले हुए थे। पूरे देश ने देखा था। मैं अरविंद केजरीवाल जी से पूछना चाहता हूँ… मौलाना अरविंद केजरीवाल जी, जब आप ईद को लॉकडाउन के समय मनाने की परमिशन दे सकते हैं तो जब कोविड का केस 1 प्रतिशत भी नहीं है, जब आपने पूरे स्कूल खोलने की परमिशन दे दी है, जब आपने होटल को फुल कैपिसिटी में खोलने की परमिशन दे दी है, तो फिर क्यों हिंदू त्योहारों को टारगेट किया जा रहा है? मैं मौलाना केजरीवाल को चुनौती देता हूँ कि तुम चाहे परमिशन दो या न दो, छठ पूजा जिस प्रकार से मनाई जाती है, उसी प्रकार से धूम-धाम से मनाई जाएगी। तुम्हारी हिम्मत है तो रोक के दिखा देना।”



