Gold-Silver ETF New Rules: SEBI ने लिया बड़ा फैसला, 1 सितंबर से बदलने जा रहे हैं ETF में निवेश का नियम!

Gold-Silver ETF New Rules: शेयर बाजार में गोल्ड-सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में निवेश करने वाले लोगों के लिए जरूरी खबर है। 1 सितंबर 2026 से कमोडिटी ETF मार्केट से जुड़े नियम बदलने वाले हैं। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एक संशोधित ETF फ्रेमवर्क लागू करने जा रहा है। इस नए नियम का मेन मकसद घरेलू बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना, सही कीमत का पता लगाना और छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा करना है। अब तक ग्लोबल मार्केट्स में रातोंरात होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भारतीय ETF पर तुरंत नहीं दिखता था, जिससे निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता था। लेकिन नया सिस्टम इस अंतर को पूरी तरह खत्म कर देगा।
प्री-ओपन कॉल ऑक्शन की होगी व्यवस्था
जब इंटरनेशनल लेवल पर सोने या चांदी की कीमतों में देर रात बड़ा बदलाव होता है, तो भारतीय ईटीएफ मार्केट अगले दिन उस रफ्तार को तुरंत पकड़ नहीं पाता था। इस अंतर को दूर करने के लिए SEBI ने एक बेहद संवेदनशील कदम उठाया है। नए स्ट्रक्चर के तहत मार्केट खुलते ही एक स्पेशल प्री-ओपन कॉल ऑक्शन मैकेनिज्म और डायनेमिक प्राइस बैंड की शुरुआत की जाएगी। यह सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि जब आप सुबह ट्रेडिंग शुरू करें, तो आपको ग्लोबल मार्केट्स के बिल्कुल बराबर और सही कीमतें मिलें। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच का अंतर लगभग खत्म हो जाएगा, जिससे निवेशकों का भरोसा बाजार पर और मजबूत होगा।
बिना अपर लिमिट के बढ़ेगी अपर लिमिट
बाजार नियामक ने इस नए फ्रेमवर्क में ट्रेडिंग के लिए एक लचीला सुरक्षा कवच तैयार किया है। इसके तहत गोल्ड-सिल्वर ETF में ट्रेडिंग की शुरुआत ±6 प्रतिशत के शुरुआती प्राइस बैंड के साथ होगी। अगर बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, तो एक निश्चित कूलिंग-ऑफ पीरिएड के बाद इस बैंड को 3-3 प्रतिशत के स्टेप्स में आगे बढ़ाया जा सकेगा। पुराने नियमों के उलट, अब एक ही ट्रेडिंग सेशन के दौरान इस बैंड को कितनी भी बार बढ़ाया जा सकता है, इसकी कोई अपर लिमिट तय नहीं की गई है। इसके अलावा, लिक्विड और ओवरनाइट ETF के लिए क्लोज-आउट नियमों को भी बदला गया है, जिससे बाजार में किसी भी प्रकार की विसंगति न आए और सेटलमेंट पूरी तरह सही हो।
बेस प्राइस तय करने का नया फॉर्मूला
Gold-Silver ETF New Rulesनिवेशकों को किसी भी प्रकार के अप्रत्याशित झटके से बचाने के लिए सेबी ने बेस प्राइस तय करने की पूरी कार्यप्रणाली को ही बदल दिया है। सितंबर 2026 से, पिछले ट्रेडिंग सेशन के आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) को बेस मानकर रिफेरेंस प्राइस तय किया जाएगा। इससे कीमतों की कैलकुलेशन होने के कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के समय दिखने वाले प्रीमियम या



