छत्तीसगढ़ न्यूज़ (समाचार)

Cg News: प्रसिद्ध कोसा सिल्क कपड़ा कारोबार मे 25 फीसदी गिरावट.

Cg News :   छत्तीसगढ़ मे चांपा का कोसा सिल्क देशभर मे प्रसिद्ध था, कोसा कपड़े की डिमांड पहले की अपेक्षा कोरोना के बाद बाजार मे  25 फीसदी से  गिरा कि आज तक नहीं उठ पाया है। अब कोसा कारीगरों को मजदूरी भुगतान के लिए भी पैसे नहीं निकल पा रहे हैं।

कोसा कपड़े में डिमांड 

एक समय था, जब  अच्छी हाई क्वालिटी और नर्म होने से चांपा के कोसा कपड़े की सप्लाई तकरीबन 25 देशों तक थी। लेकिन अब सिर्फ साड़ियों की डिमांड रह गई है।      पहले एक एक व्यवसायी साल में 1-1 करोड़ का कारोबार करते थे लेकिन अब कारोबार 25 लाख से भी ऊपर नहीं जा पा रहा है। क्योंकि अब लोग ब्रांडेड कपड़े पहन रहे है।

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कारीगर बताते है कि 

चांपा के वासुदेव देवांगन बताते हैं कि पहले वे बेंगलूरु, दिल्ली, मुंबई में कोसा कपड़ा सप्लाई करते थे, लेकिन अब डिमांड पहले की अपेक्षा बेहद कम है। फिर भी बीते सीजन के हिसाब से कुछ-कुछ डिमांड आने लगी है।

नंद कुमार देवांगन ने बताया कि कोसा के कपड़े को अब कोई नहीं पूछता। लोग अब ब्रांडेड कपड़े पहनने लगे हैं। कोसा कपड़ा भी महंगा है लेकिन इसमें सिर्फ साडिय़ों का कारोबार ही बचा है। शेष अन्य तरह के कपड़े नहीं के बराबर बिक रहे।

कोसा कपड़े के कारोबार मे भारी गिरावट

पहले 500 करोड़ रुपए तक जा पहुंचता था, लेकिन अब स्थिति ऐसी आन पड़ी है कि इनका कारोबार 100 करोड़ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पा रहा है। पहले लोग कोसा कपड़े को बड़े शान से पहनते थे, लेकिन अब लोग साड़ी समेत कुर्ता पायजामे में भी ब्रांड खोजते हैं।

बुनकर परिवार अन्य रोजगार की तलाश

प्रदेश में सबसे बड़ा चांपा में कोसा कपड़े का कारोबार है।      पहले देश के बड़े शहरों के अलावा 20 देशों में कोसा कपड़े का कारोबार होता था, लेकिन अब इसका दायरा एकदम से सीमित हो चुका है। चांपा, सक्ती सहित आसपास के गांवों में 25 हजार बुनकर परिवार संकट मे हैं। जिनके पास अब रोजी-रोटी का संकट आन पड़ा है। इसकी प्रमुख वजह कोसा कपड़े की डिमांड नहीं के बराबर है।  इसकी भरपाई के लिए हथकरघा के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार से मांग की जा रही है। ताकि स्थानीय कोसा बुनकरों को रोजगार मिल सके।

विदेशो मे फेमस साड़ी कि अधिकतम कीमत 15 हजार तक थी

यहां साड़ी 1000 से लेकर 15 हजार रुपए तक की साड़ियां बनती थी। यह साड़ी विदेशों में ज्यादा फेमस थी और यही साड़ी विदेशों में 40 से 50 हजार रुपए तक बिकती थी। जबसे कोसा कपड़े का मार्केट डाउन हुआ है तब से इन्हीं साड़ियों की कीमत 3 से 4 हजार तक कम हो चुका है। जो साड़ी पहले देश के भीतर 10 हजार तक बेचते थे उन्हीं साड़ियों की कीमत 3 से 4 हजार रुपए में भी नहीं बिक रही है।

 

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