*✍️सेक्स रैकेट:’व्हाइट सीमेंट’ और ‘ब्लैक कॉफी’ के नाम से बुलाई जाती थी लड़किया,बहुत ही शातिराना अंदाज मे कोर्ड वर्ड का इस्तेमाल करके मोबाइल पर करते थे बुकिंग…*

RGHNEWS ‘व्हाइट सीमेंट’ और ‘ब्लैक कॉफी’ की डिमांड से पुलिस परेशान है। ताजनगरी बदनाम हो रही है। आखिर व्हाइट सीमेंट है क्या। यह जेल भेजे गए देसी और विदेशी बालाओं के एजेंट भीमा ने पुलिस को बताया। पूछताछ में उसने कई राज खोले। पुलिस को बताया कि एजेंटों के बीच ज्यादातर बातचीत व्हाट्स एप चैट पर होती है। फोन पर बात करते हैं तो कभी लड़की शब्द का इस्तेमाल नहीं करते। पता नहीं कौन किसकी रिकार्डिंग कर रहा हो। कौन उसे सुन रहा हो। विदेशी युवती को व्हाइट सीमेंट और देसी युवती को ब्लैक कॉफी बुलाते हैं।एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि ताजगंज स्थित शुभ रिसोर्ट से गिरफ्तार भीमा बेहद शातिर है। इस धंधे में लंबे समय से है। दिल्ली के एक नहीं कई एजेंट उसके संपर्क में हैं। जयपुर, गोवा आदि जगह के एजेंट भी उसके मिलने वाले हैं। साल में एक बार सभी जगह के एजेंट आपस में मिलते हैं। धंधे के नियम बनाए जाते हैं। वैसे पूरा धंधा फोन पर चलता है।
एसपी सिटी ने बताया कि भीमा का मोबाइल कब्जे में है। गलीच धंधे पर शिकंजे के लिए उन होटलों और एजेंट पर कार्रवाई की जाएगी जो युवतियों को रुकवाने और सप्लाई करने का काम करते हैं। एसपी सिटी ने बताया कि भीमा से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां हुईं। उसने बताया कि पुलिस को भी पता होता है कि कहां कौन एजेंट है। पुलिस भी उन पर नजर रखती है। सर्विलांस के जरिए पुलिस यह पता लगा सकती है कि कौन किससे क्या बात कर रहा है। इसलिए वे आपस में बातचीत के दौरान विशेष सावधानी बरते हैं। ग्राहकों से व्हाट्स एप कॉल पर बातचीत करते हैं। युवती का ऑर्डर भी कोड वर्ड में दिया जाता है। व्हाट्स सीमेंट के पांच पैकेट और ब्लैक कॉफी के छह डिब्बे चाहिए। इसका मतलब है कि पांच विदेशी और छह देसी युवतियां चाहिए। समय न बताने पर यह माना जाता है कि सात दिन की बुकिंग है। इससे ज्यादा दिन के लिए चाहिए होती हैं तो यह भी दूसरे अंदाज में बताया जाता है।