*✍️बिना चाय बनाये बाहर जा रही थी पत्नी तो पति ने किया कुछ ऐसा की हाईकोर्ट ने कहा “पत्नी कोई गुलाम या कोई वस्तु नही”…*

RGHNEWS न्यायमूर्ति रेवती मोहिते देरे ने इस महीने की शुरुआत में पारित आदेश में कहा कि ‘विवाह समानता पर आधारित साझेदारी है’, लेकिन समाज में पितृसत्ता की अवधारणा अब भी कायम है और अब भी यह समझा जाता है कि महिला पुरुष की सम्पत्ति है, जिसकी वजह से पुरुष यह सोचने लगता है कि महिला उसकी ‘गुलाम’ है।अदालत ने कहा कि अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने के बाद, उसे अस्पताल ले जाने से पहले सबूत नष्ट करने में कीमती समय बर्बाद हुआ। इसलिए सजा में कोई अनहोनी नहीं हुई और इसलिए अपील खारिज की जाती है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के दोषी पति की अपील पर किसी भी प्रकार की उदारता दिखाने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोषी पति की इस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि पत्नी के चाय बनाने से इनकार करने पर वो आपा खो बैठा और गुस्से में उसकी हत्या कर दी थी। मामला साल 2013 का है और पति संतोष को 10 साल की सजा सुनाई गई थी। इस पूरी घटना को इस जोड़े की छह साल की बेटी ने अपनी आंखों से देखा था और गवाही भी दी थी। कोर्ट ने दलील खारीज करते हुए कहा कि पत्नी ‘कोई गुलाम या कोई वस्तु नहीं’ है।