*✍️किसानों का काजू खा गए उद्यान विभाग के अधिकारी… और कागजों में दिखा दी प्रोग्रेस रिपोर्ट … क्या है पूरा मामला पढ़ें पूरी खबर…!!!!*

RGHNEWS प्रशांत तिवारी रायगढ़ उद्यान विभाग में किसानों का दाना हजम कर जाने की बात कोई नई नहीं है लेकिन इस बार उद्यान विभाग के अधिकारियों ने 11.100 हेक्टेयर में काजू के पौधे लगाने के नाम पर जमकर घोटाला किया है। हैरानी की बात यह है, कि किसानों को बिना काजू के पौधे दिए उद्यान अधीक्षक ने प्रोग्रेस रिपोर्ट बनाकर अपने वरिष्ठ अधिकारियों को थमा दी और वरिष्ठ अधिकारियों ने चोर चोर मौसेरे भाई की तर्ज पर पूरे घोटाले को एक नंबर का काम साबित कर दिया। उद्यान विभाग का यह घोटाला शायद कागजों में ही दफन होकर रह जाता, ना तो यह बात सामने आ पाती और ना ही किसानों को अपने साथ हुई ठगी के बारे में कभी पता चल पाता। आरटीआई में मिली जानकारी में उक्त घोटाला सामने आया है किसानों के नाम पर आवंटित काजू के पौधे वितरण के संबंध में जब किसानों से ही पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी भी काजू के पौधे नहीं लगाए और उद्यान विभाग ने उन्हें ऐसा कोई पौधा लगाने के लिए नहीं दिया है। संबंधित किसान हैरान है, कि आखिर उद्यान विभाग के अधिकारियों की हाजमा शक्ति इतनी प्रबल कैसी है, कि वह पेड़ पौधे भी आसानी से हजम कर जाते हैं।
- लैलूंगा विकासखंड में आई है सामने गड़बड़ी, अन्य विकास खंडों की पड़ताल जारी
यह घोटाला लैलूंगा ब्लॉक का है जहां उद्यान अधीक्षक ने किसानों के साथ यह फर्जीवाड़ा किया है और किसानों को मिलने वाला काजू का पौधा हजम कर चुका है। उद्यान अधीक्षक की ओर से निश्चित तौर पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी काजू खिलाया गया होगा वरना वरिष्ठ अधिकारी आंख मूंदकर अपने अधीक्षक पर यूं ही भरोसा नहीं कर लिए होते?
- क्या कह रहे हैं किसान
इस घोटाले के संबंध में हमारी चर्चा मिली जानकारी में दर्ज किसानों से हुई। किसान ने बताया कि इसने पिछले 20 साल में कभी भी काजू का पौधा अपनी जमीन पर नहीं लगाया है लेकिन उसके नाम पर अधिकारियों ने पौधा वितरण होना बताया है यह पूरी तरह से न केवल किसानों से बल्कि सरकार से भी अधिकारियों ने धोखाधड़ी की है। इसी प्रकार अन्य किसानों ने भी बताया कि उन्हें पौधे वितरण के संबंध में कोई जानकारी नहीं है और ना ही उद्यान विभाग के किसी भी व्यक्ति की ओर से उन्हें काजू का पौधा ही दिया गया। किसानों ने मांग की है कि इस फर्जीवाड़े में संलिप्त नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों, कर्मचारियों तक कार्रवाई होने की आवश्यकता है बल्कि ऐसे फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले अधिकारियों पर धोखाधड़ी की अपराधिक धाराओं के तहत पुलिस थाने में अपराध दर्ज होना चाहिए।



