Skand Shashthi 2026:स्कंद षष्ठी व्रत 22 या 23 अप्रैल? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि से जुड़ी पूरी जानकारी

Skand Shashthi 2026:स्कंद षष्ठी का पर्व मुख्य रूप से दक्षिण भारत में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान स्कंद की पूजा की जाती है, जिन्हें मुरुगन, कार्तिकेय और सुब्रह्मण्य नामों से भी जाना जाता है।
यह व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से भगवान कार्तिकेय की आराधना और व्रत करते हैं, उनके जीवन के कष्ट दूर होते हैं। साथ ही संतान से जुड़ी परेशानियों में भी राहत मिलने की मान्यता है।
अब जानते हैं कि अप्रैल महीने में स्कंद षष्ठी कब पड़ रही है और इसकी पूजा विधि क्या है।
स्कंद षष्ठी 2026
- स्कंद षष्ठी – 22 अप्रैल 2026, बुधवार
- प्रारम्भ – 01:19 AM, अप्रैल 22
- समाप्त – 10:49 PM, अप्रैल 22
स्कन्द षष्ठी की पूजा विधि
- स्कंद षष्ठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनें और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा बनाएं।
- प्रतिमा बनाने के लिये किसी साफ स्थान से मिट्टी लेकर आएं।
- अब इस मिट्टी का पिंड बनाकर उसके ऊपर 16 बार ‘बम्’ शब्द का उच्चारण करें।
- शास्त्रों में ‘बम्’ को सुधाबीज, यानि अमृत बीज कहा जाता है।
- कहते हैं ‘बम्’ के उच्चारण से यह मिट्टी अमृतमय हो जाती है।
- अब उस मिट्टी से कुमार कार्तिकेय की मूर्ति बनानी चाहिए।
- मूर्ति बनाते समय मंत्र पढ़ना चाहिए- “ऊँ ऐं हुं क्षुं क्लीं कुमाराय नमः”।
- मूर्ति बनाने के बाद भगवान का आह्वान करना चाहिए और कहना चाहिए- “ऊँ नमः पिनाकिने इहागच्छ इहातिष्ठ”।
- फिर भगवान के पैर आदि का पूजन करना चाहिए।
- इसके बाद भगवान को स्नान कराना चाहिए और स्नान कराते समय कहना चाहिए- “ऊँ नमः पशुपतये”।
- स्नान के बाद “ऊँ नमः शिवाय” मंत्र से गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य भगवान को अर्पित करें।
- इस तरह पूजा के बाद भगवान की मूर्ति को आदरपूर्वक जल में विसर्जित कर देना चाहिए।
- इस तरह कुमार कार्तिकेय की पूजा करने और उनके निमित्त व्रत रखने से व्यक्ति राजा के समान सुख भोगता है और उसे नौकरी में उच्च पद की प्राप्ति होती है।
स्कन्द षष्ठी व्रत का महत्व
Skand Shashthi 2026:स्कन्द षष्ठी के अवसर पर कार्तिकेय भगवान की प्रतिमा की स्थापना करके उनकी पूजा की जाती है और अखंड दीपक जलाएं जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को विधि विधान रखने से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है और यदि पहले से संतान है तो उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस व्रत को करने से मंगल ग्रह भी मजबूत होता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। Rgh News एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)



