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SEBI New Rule: डीमैट निवेशकों के लिए जरूरी खबर! SEBI लाने जा रहा है नए नियम

SEBI New Rule भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डीमैट अकाउंट में म्यूचुअल फंड यूनिट रखने वाले लाखों निवेशकों के लिए रिडेम्पशन (पैसे निकालने) की प्रक्रिया आसान करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत ऑटोमेटेड स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन शुरू करने की बात कही गई है. 5 फरवरी 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में SEBI ने डीमैट और स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (SOA) मोड के बीच का फर्क कम करने का सुझाव दिया है. इसका मकसद यह है कि सिस्टमेटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) और सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (STP) बिना हर बार मैनुअल दखल के अपने आप चल सकें.

 

 

अभी डीमैट अकाउंट होल्डर्स को हर बार पैसे निकालने या ट्रांसफर के लिए नई इंस्ट्रक्शन देनी पड़ती है. SEBI का मानना है कि यह झंझट खत्म होनी चाहिए ताकि स्टॉक एक्सचेंज के जरिए खरीदे गए म्यूचुअल फंड में भी ऑटोमेटिक विदड्रॉल संभव हो सके.

 

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DIS की झंझट होगी खत्म

रेगुलेटर ने माना है कि अभी डिलीवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप (DIS) की मैनुअल जरूरत निवेशकों के लिए बड़ी परेशानी है. हर महीने या तिमाही पैसे निकालने के लिए अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते हैं, जिससे देरी होती है और लोग डीमैट मोड में SWP/STP लेने से बचते हैं.

 

 

पावर ऑफ अटॉर्नी के बिना पूरा कंट्रोल

कई निवेशक इस झंझट से बचने के लिए ब्रोकर को पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) दे देते हैं, लेकिन इससे निवेश पर सीधा कंट्रोल कम हो जाता है. SEBI चाहता है कि स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन सीधे डिपॉजिटरी सिस्टम में हों, ताकि निवेशक का पूरा कंट्रोल भी बना रहे और सुविधा भी मिले.

 

सेटलमेंट प्रोसेस होगी आसान

फिलहाल STP के हर इंस्टॉलमेंट में ब्रोकर, एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन के बीच लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. हर बार सेल और बाय ऑर्डर डालना पड़ता है, जिससे गलती और देरी की संभावना रहती है. नया सिस्टम इसे ऑटोमेटिक बनाने की कोशिश है.

 

RTA के साथ ऑटोमेशन

SEBI का प्रस्ताव है कि स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन से डिपॉजिटरी और RTA (रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट) के बीच डेटा अपने आप तय तारीख पर ट्रांसफर हो जाए. इससे हर बार नए ऑर्डर डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पैसा सीधे बैंक अकाउंट में पहुंच जाएगा.

 

वर्किंग ग्रुप की सिफारिश

SEBI ने इसके लिए एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और RTA के एक्सपर्ट्स का वर्किंग ग्रुप बनाया था. ग्रुप ने सिफारिश की कि जैसे SOA मोड में SWP/STP की सुविधा है, वही सुविधा डीमैट होल्डर्स को भी मिलनी चाहिए.

 

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दो चरणों में लागू होगा सिस्टम

SEBI New Ruleपहले चरण में यूनिट-बेस्ड SWP/STP की सुविधा आएगी, जिसमें तय यूनिट्स नियमित अंतराल पर बेची या ट्रांसफर की जा सकेंगी. दूसरे चरण में अमाउंट-बेस्ड SWP/STP, स्विंग STP और प्रॉफिट-बेस्ड विदड्रॉल जैसे एडवांस विकल्प भी मिलेंगे. कुल मिलाकर, SEBI का यह कदम डीमैट अकाउंट में म्यूचुअल फंड निवेश को ज्यादा आसान, सुरक्षित और निवेशक-फ्रेंडली बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा

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