Mutual Funds Manage Liquidity: Mutual Funds के नियमों में बड़ा बदलाव, जानिए निवेशकों के ऊपर क्या पड़ेगा असर

Mutual Funds Manage Liquidity: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड के लिए नकदी प्रंबंधन को लेकर कारोबार के दौरान कर्ज लेने के नियमों में आसान बनाया है। इसके तहत नियामक ने शुक्रवार को म्यूचुअल फंड कंपनियों को कारोबार के दौरान लिए जाने वाले अल्पकालिक ऋण का उपयोग केवल निवेशकों को धन लौटाने तक सीमित रखने के बजाय व्यापार निपटान, विदेशी मुद्रा दायित्वों और डेरिवेटिव मार्जिन भुगतान सहित व्यापक नकदी प्रबंधन जरूरतों के लिए करने की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।इस कदम का उद्देश्य उन परिचालन संबंधी चुनौतियों को दूर करना है, जिनका सामना परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को विभिन्न योजनाओं में नकदी के बाहर जाने और आने के बीच समय अंतर के कारण करना पड़ता है।
म्यूचुअल फंड के लिए नए नियम
वर्तमान में कारोबार के दौरान लिया जाने वाला अल्पकालिक ऋण म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए नकदी प्रवाह प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे कोष प्रबंधकों को भुगतान दायित्वों और निपटान आवश्यकताओं को समय पर पूरा करने में सहायता मिलती है।सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय संवाददाताओं को बताया कि बाजार नियामक के निदेशक मंडल ने म्यूचुअल फंड विनियम, 2026 में संशोधन को मंजूरी दी है, जिसके तहत म्यूचुअल फंड कंवपिश्सें को दैनिक नकदी असंतुलन को पूरा करने के लिए कारोबार के दौरान ऋण लेने की सुविधा दी जाएगी।
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अब कर्ज लेना होगा आसान
Mutual Funds Manage Liquidityसंशोधन के तहत म्यूचुअल फंड इकाइयों को परिसंपत्ति वर्गों के भीतर भुगतान-प्राप्ति निपटान समय अंतर, विदेशी मुद्रा निपटान, डेरिवेटिव स्थितियों के मूल्य परिवर्तन से जुड़े भुगतान आदि को पूरा करने के लिए कारोबार के दौरान ऋण लेने की अनुमति होगी। हालांकि यह कुछ सुरक्षा उपायों के अधीन होगा। ये सुविधा वर्तमान में उपलब्ध उस प्रावधान के अतिरिक्त होगी, जिसके तहत निवेशकों को धन लौटाने जैसे कार्यों के लिए योजना की शुद्ध परिसंपत्तियों के 20 प्रतिशत तक ऋण लेने की अनुमति है।


