India Poverty Report 2026: वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा; भारत में तेजी से घट रही गरीबी, 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर

India Poverty Report 2026 भारत में गरीबी के मोर्चे पर पिछले एक दशक में बड़ी तस्वीर बदली है। देश में करोड़ों लोग गरीबी के दायरे से बाहर निकले हैं। वर्ल्ड बैंक की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 से 2023 के बीच भारत में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान गरीब आबादी का अनुपात तेजी से घटा है। खपत में बढ़ोतरी, रोजगार के नए अवसर और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली मदद को इस बदलाव की प्रमुख वजह बताया गया है।
वर्ल्ड बैंक के अनुसार, 2011 में भारत की 57.7 फीसदी आबादी प्रतिदिन 4.20 डॉलर (2021 की क्रय शक्ति समानता यानी PPP के आधार पर) से कम आय पर जीवन गुजार रही थी। 2023 तक यह आंकड़ा घटकर 16.1 फीसदी रह गया। इस आधार पर करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। वहीं, अत्यधिक गरीबी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रतिदिन 3 डॉलर से कम पर गुजारा करने वाली आबादी का हिस्सा 2011 में 27.1 फीसदी था, जो 2023 में घटकर केवल 2.6 फीसदी रह गया।
रोजगार और सरकारी योजनाओं ने निभाई अहम भूमिका
रिपोर्ट में गरीबी घटने के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें लोगों की खपत में मजबूत वृद्धि, रोजगार के अवसर बढ़ना और खाद्य सब्सिडी जैसी सरकारी सहायता योजनाओं का विस्तार शामिल है। खास बात यह है कि रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से भी परिवारों की कमाई को सहारा मिला। 2017 से 2023 के बीच देश में रोजगार करने वाले लोगों की संख्या करीब 13.4 करोड़ बढ़ी। यह इसी अवधि में कामकाजी उम्र की आबादी में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी है। इस बढ़ोतरी में ग्रामीण महिलाओं के वेतन वाले काम में आने की बड़ी भूमिका रही।
2028 तक गरीबी और घटने का अनुमान
वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि गरीबी में कमी का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा, हालांकि इसकी रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है। 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी का हिस्सा 2026 में 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी होने की उम्मीद है।
कम शिक्षा और स्थिर रोजगार की कमी बनी चुनौती
India Poverty Report 2026 के मुताबिक, अब गरीबी उन परिवारों में अधिक केंद्रित है, जहां शिक्षा का स्तर कम है, संपत्ति सीमित है और स्थिर रोजगार के अवसर कम हैं। वेतन में असमानता भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की मीडियन कमाई, सबसे कम कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों से करीब 13 गुना थी।
One Comment