Hanuman Jayanti 2026: आज है हनुमान जयंती, यहां जानें पूजा विधि, कथा, आरती सहित अन्य जानकारी – RGH NEWS
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Hanuman Jayanti 2026: आज है हनुमान जयंती, यहां जानें पूजा विधि, कथा, आरती सहित अन्य जानकारी

Hanuman Jayanti 2026 हनुमान जयंती 2 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शुभ मुहूर्त में बजरंगबली की विधि विधान पूजा करते हैं। वहीं कई भक्त इस दिन सुदरकांड का पाठ भी करते हैं। यहां आप जानेंगे हनुमान जयंती की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा, आरती समेत संपूर्ण जानकारी।

 

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हनुमान जयंती हिंदू धर्म का एक बड़ा और महत्वपूर्ण त्योहार है, जो प्रत्येक वर्ष चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पवन पुत्र हनुमान की उपासना करते हैं। अलग-अलग राज्यों में हनुमान जयंती अलग-अलग तारीखों में मनाई जाती है। जैसे तमिलनाडु में ये त्योहार मार्गशीर्ष अमावस्या पर मनाया जाता है तो वहीं कर्नाटक में मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को ये पर्व मनाते हैं। वहीं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ये त्योहार पूरे 41 दिनों तक मनाया जाता है। लेकिन उत्तर भारत में हनुमान जन्मोत्सव चैत्र पूर्णिमा के दिन ही सेलिब्रेट किया जाता है और इस बार ये त्योहार 2 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है। चलिए आपको बताते हैं हनुमान जयंती की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा, आरती, मंत्र समेत सभी जरूरी जानकारी।

 

 

Hanuman Jayanti 2026हनुमान जयंती शुभ मुहूर्त 2026 (Hanuman Jayanti 2026 Shubh Muhurat)

ब्रह्म मुहूर्त – 04:38 AM से 05:24 AM

प्रातः सन्ध्या – 05:01 AM से 06:10 AM

अभिजित मुहूर्त – 12:00 PM से 12:50 PM

विजय मुहूर्त – 02:30 PM से 03:20 PM

गोधूलि मुहूर्त – 06:38 PM से 07:01 PM

सायाह्न सन्ध्या – 06:39 PM से 07:48 PM

अमृत काल – 11:18 AM से 12:59 PM

हनुमान जयंती पूजा विधि (Hanuman Jayanti Puja Vidhi)

हनुमान जयंती के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।

इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें।

फिर हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं।

भगवान को सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करें।

उन्हें गुड़-चना, लड्डू या केले का भोग लगाएं।

इसके बाद हनुमान चालीसा, बजरंगबाण या सुंदरकांड का पाठ करें।

अंत में हनुमान जी की आरती करके प्रसाद सभी में बांट दें।

हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti)

आरती कीजै हनुमान लला की।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

आरती कीजै हनुमान लला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।

रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई।

संतन के प्रभु सदा सहाई॥

आरती कीजै हनुमान लला की।।

दे बीरा रघुनाथ पठाए।

लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।

जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।

सियारामजी के काज सवारे॥

आरती कीजै हनुमान लला की।।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।

आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जम-कारे।

अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुरदल मारे।

दाहिने भुजा संतजन तारे॥

आरती कीजै हनुमान लला की।।

सुर नर मुनि आरती उतारें।

जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई।

आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमान जी की आरती गावे।

बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

आरती कीजै हनुमान लला की।।

आरती कीजै हनुमान लला की।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

आरती कीजै हनुमान लला की।।

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