छत्तीसगढ़ न्यूज़ (समाचार)

Contract Employees News: संविदा कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का आदेश; एकाउंटेंट, भृत्य सहित इन कर्मचारियों को सेवा से हटाया गया…

Contract Employees News  कलेक्टर रोहित व्यास ने संविदा पर कार्यरत समग्र शिक्षा विभाग अंतर्गत विभिन्न पदों पर कार्यरत् 06 कर्मचारियों को अनाधिकृत रूप से लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के कारण सेवा से पृथक किए जाने की कार्रवाई की है, जिसमें लेखापाल पुष्पा टोप्पो, बी.आर.पी. समावेशी शिक्षा ज्योति साहू एवं कु. मेघा दुबे, सूचना प्रबंध समन्वयक नवीन कुमार पटेल तथा भृत्य पद पर कार्यरत सविता बाई एवं नंदकिशोर चौहान शामिल

उल्लेखनीय है कि उक्त सभी कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना अथवा स्वीकृत अवकाश के लगातार कार्य से अनुपस्थित थे। उनके विरुद्ध पूर्व में कई बार विभाग द्वारा पत्र प्रेषित कर कार्य पर उपस्थिति देने हेतु निर्देशित किया गया था, परंतु न तो उन्होंने कोई जवाब दिया और न ही अपनी ड्यूटी पर उपस्थित हुए। कलेक्टर ने ड्यूटी से लंबे समय से गैरहाजिर कर्मियों के इस कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-03 का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए सेवा से पृथक किए जाने की कार्रवाई की।

 

दूसरी ओर संविदा पर प्रदेश के अलग-अलग विभागों में कार्यरत कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर संविदा कर्मचारियों ने प्रदर्शन भी किया है, लेकिन अब तक इनकी मांग पूरी नहीं हो पाई है।

किन संविदा कर्मचारियों को सेवा से हटाया गया है?

उत्तर: लेखापाल पुष्पा टोप्पो, बीआरपी ज्योति साहू एवं मेघा दुबे, सूचना प्रबंध समन्वयक नवीन पटेल, भृत्य सविता बाई और नंदकिशोर चौहान को हटाया गया है।

 

कर्मचारियों के खिलाफ क्या कारण बताया गया?

उत्तर: सभी कर्मचारी बिना पूर्व सूचना के लंबे समय से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए थे। उन्हें कई बार विभाग द्वारा चेतावनी दी गई थी।

 

: यह कार्रवाई किस नियम के अंतर्गत की गई है?

उत्तर: यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-03 के उल्लंघन के तहत की गई है।

 

क्या संविदा कर्मचारी नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं?

उत्तर: हां, छत्तीसगढ़ में कई संविदा कर्मचारी पिछले लंबे समय से नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

क्या इस निर्णय का अन्य कर्मचारियों पर असर पड़ेगा?

Contract Employees News: संभवतः हां। यह निर्णय एक मिसाल के रूप में देखा जा सकता है और अन्य संविदा कर्मियों पर भी ड्यूटी अनुशासन के लिए दबाव बना सकता है।

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