Chhattisgarh news: छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला! 11 दवाइयां तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट

Chhattisgarh news सीजीएमएससी ने इस साल 11 दवाइयां व इंजेक्शन ब्लैकलिस्टेड किए गए हैं। दरअसल फार्मास्यूटिकल कंपनियों ने समय पर इनकी सप्लाई नहीं की। जबकि कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड नहीं किया गया, क्योंकि ऐसा नियम नहीं है। दवा कॉर्पोरेशन ने दवाएं गुणवत्ताविहीन निकलने पर इस साल कोई कार्रवाई नहीं की है, जो आश्चर्यजनक है।
दवाइयों की क्वालिटी पर उठ चुके सवाल
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने पिछले साल 660 करोड़ के रीएजेंट व मेडिकल इक्विपमेंट घोटाले में शामिल मोक्षित कॉर्पोरेशन समेत 7 कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया था। इस बार केवल प्रोडक्ट को ब्लैकलिस्टेड किया गया है। सीजीएमएससी से सप्लाई दवाइयों की क्वालिटी पर सवाल उठते रहे हैं। 660 करोड़ के रीएजेंट व मेडिकल उपकरण घोटाले में तत्कालीन हैल्थ डायरेक्टर व सीजीएमएससी के एमडी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि वे खरीदी में सीधे जिम्मेदार थे।
पिछले साल विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार 28 करोड़ के रीएजेंट खराब हो चुके हैं। यही नहीं मोक्षित द्वारा सप्लाई ब्लड जांचने वाली मशीन भी बंद है, क्योंकि इसे लॉक कर दिया गया है। ताकि मोक्षित से ही रीएजेंट का उपयोग किया सके। मोक्षित कॉर्पोरेशन के खिलाफ शिकायत 2022 में हुई थी, लेकिन मामला दबा दिया गया था। विधानसभा के मानसून सत्र में भी दवाइयों की क्वालिटी पर सवाल उठ चुके हैं।
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हाईकोर्ट ने लगाया था 25 हजार जुर्माना, इंजेक्शन तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टेड
हाईकोर्ट ने डिवाइन लेबोरेटरी पर पिछले साल जुलाई में 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। यह कार्रवाई घटिया हिपेरिन इंजेक्शन की सप्लाई पर की गई है। कंपनी ने इंजेक्शन को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टेड करने पर हाईकोर्ट में सीजीएमएससी के आदेश को चुनौती दी थी। कंपनी की याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने यह कार्रवाई की थी। पत्रिका ने यह मामला लगातार उठाया था। दरअसल हिपेरिन इंजेक्शन गाढ़े खून को पतला करने के लिए लगाया जाता है। कार्डियोलॉजी व कार्डियक सर्जरी विभाग ने प्रबंधन को पत्र लिखकर इंजेक्शन को घटिया बताते हुए इसे मरीजों के लिए खतरनाक भी बताया था।



