रायगढ़ न्यूज़ (समाचार)

नवपदस्थ SP सदानंद कुमार से खास मुलाकात,एक नजर SP सदानंद कुमार जी पर …जाने क्या कहते हैं पुलिस अधीक्षक….*

Raigarh News Prashant Tiwari रायगढ़!  हर व्यक्ति के जीवन की पहली शिक्षक मां ही होती है। उन्हीं के संस्कारों से आदमी अपनी पूरी जीवनबेल को सींचता है। यही संस्कार जीवनयात्रा की नींव को मजबूत बनाते हैं। रायगढ़ के नवपदस्थ एसपी सदानंद कुमार को भी मां से ऐसे संस्कार मिले, जिसके कारण वे शिखर तक पहुंच सके। उन्होंने अपनी सफलता में मां के संघर्ष को सबसे अहम माना। उनकी आदर्श भी मां ही हैं। केलो प्रवाह ने उनसे विशेष चर्चा की और पारिवारिक व पुलिसिंग के अलग-अलग पहलुओं पर बातचीत की।

आम जनता और पुलिस के बीच सेतु बनने से होगा क्राईम फ्री रायगढ़

SP सदानंद

एसपी सदानंद कुमार मूलत: बिहार के मुंगेर जिले के तारापुर थाना क्षेत्र के गांव मिल्की जोड़ारी के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में के ही प्रायमरी स्कूल में हुई। उसके बाद डेढ़ किमी दूर दूसरे गांव में माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की। फिर तीन किमी दूर महावीर चौधरी विद्यालय शांतिनगर में हाईस्कूल की पढ़ाई की। इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन उन्होंने मुरारका कॉलेज सुल्तानगंज भागलपुर से पूरी की। वे स्कूल और कॉलेज के टॉपर रहे। एमए के लिए भागलपुर विवि गए। ऑनर्स में भी संस्कृत विषय लेकर पढ़ाई की विवि टॉपर रहे। वे गोल्ड मेडलिस्ट हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा को व्यापक किया और नई दिल्ली का रुख किया।

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वहां उन्होंने लालबहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ में बीएड करने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। इसके बाद उन्हें बिहार में ही हाईस्कूल टीचर नौकरी मिली। कुछ समय तक नौकरी करने के बाद वे वापस दिल्ली आ गए। यहां उनका चयन दिल्ली सरकार के हाईस्कूल में हुआ। यहां करीब तीन साल तक सेवा देने के बाद 2010 में ही बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में वे चयनित हुए और दूसरे स्थान पर रहे। उसी साल यूपीएससी में भी वे चयनित हुए और आईपीएस बन गए।

टीचर से पुलिस अधीक्षक तक सफ़र

वे कहते हैं कि मूलतः बिहार भागलपुर क्षेत्र से हूँ। मेरी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूलों में हुई। इसके पश्चात कॉलेज की पढ़ाई पर फोकस किया फिर मैंने अपनी जिंदगी की शुरुआत टीचर के पद से की चूंकि मेरे ख्वाब समाज व देश की सेवा करना था इसलिए यूपीएससी के पथ पर अग्रसर हुआ। मेरी मेहनत का सुखद परिणाम मिला और आईपीएस में चयन हुआ। ख्वाब साकार होने की एक अलग ही खुशी होती है। जिसे बयां कर पाना हर किसी के लिए नामुमकिन होता है। चयन होने के पश्चात देश के विभिन्न स्थानों में सेवा करने का सुखद सुअवसर मिला साथ ही अपने उत्तरदायित्वों को निभाते हुए हर जगह व समाज के लोगों से भी काफी सीखने को मिला व मिल रहा है। मेरे ख्याल से कुछ नया सीखने का नाम ही जिंदगी है। संप्रति नारायणपुर से रायगढ़ में सेवा करने व अपने उत्तरदायित्वों को निभाने के लिए प्रभार मिला है। मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि अधीनस्थ कर्मचारियों, शहर के बुद्धिजीवियों व मीडिया के सहयोग – सुझाव से कुछ अलग करने की जिसके लिए प्रयास किया जाएगा।

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मां और बड़े भाई की वजह से पाया ये मुकाम
एसपी सदानंद कुमार पांच भाईयों में चौथे हैं। उनके पिता की मृत्यु 1984 में ही हो गई थी, तब सदानंद कुमार की उम्र बहुत कम थी। ऐसी स्थिति में परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी उनकी मां और बड़े भाई ने उठाई। मां के कठिन परिश्रम और ऊंचे विचारों के कारण पांचों भाइयों ने बेहतरीन शिक्षा प्राप्त की। बड़े भाई ने ट्यूशन पढ़ाकर अपने भाईयों को भी पढ़ाया। बाद में सदानंद कुमार ने भी उनका साथ दिया। उनका कहना है कि मां ने हमेशा से शिक्षा को सर्वोपरि रखा। पिता कृषक थे लेकिन जमीन बहुत अधिक नहीं थी। कड़े संघर्ष के बाद सभी भाइयों ने कामयाबी पाई। उनके बड़े भाई भी बिहार पुलिस में सेवा दे रहे हैं।

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SP के काफिले को देखकर आया ख्याल
चर्चा में उन्होंने बताया कि भागलपुर में पढ़ाई के दौरान एक घटना ऐसी हुई जिसके बाद उनकी महत्वाकांक्षा ने करवट ली और वे यूपीएससी की ओर आकर्षित हुए। वे और उनके कुछ दोस्त किताबें खरीदने बाजार गए थे। तब अचानक से वहां हलचल मच गई। कुछ पुलिसकर्मी रोड से लोगों को हटाने लगे। कुछ देर बाद एसपी का काफिला गुजरा। इसके बाद उन्होंने बड़े भाई से पूछा कि एसपी कैसे बनते हैं। तब उनको यूपीएससी के बारे में पूरी जानकारी मिली। साथ ही यह भी पता चला कि संस्कृत विषय के साथ भी यह परीक्षा क्रैक की जा सकती है।

मैं सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी हूं…
एसपी सदानंद कुमार बताते हैं कि आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद उनकी मां ने कभी बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया। आज जब पांचों भाई अलग-अलग क्षेत्रों में सफल हो चुके हैं तो मां ही सबसे ज्यादा खुश हैं। वे खुद शिक्षित नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि वे ही सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं क्योंकि उनके पांचों बेटे उच्च शिक्षित हैं। सदानंद कुमार ने लखनऊ में विवाह किया। उनकी पत्नी डॉक्टरेट साइंटिस्ट और रिसर्चर हैं। उनका एक सात साल का पुत्र है।

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संस्कृत ने जोड़ा साहित्य और समाज से
एसपी सदानंद कुमार ने अपनी सफलता में संस्कृत भाषा को हमकदम बनाया। उसी भाषा ने विवि टॉपर भी बनाया और आईपीएस भी। बातचीत के दौरान इस भाषा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि संस्कृत को चुनने के पीछे कुछ पारिवारिक कारण भी थे। इस भाषा ने उनको साहित्य और समाज से जोड़ा है। किसी ने सलाह दी कि साहित्य पढ़ लो तो करियर अच्छा हो जाएगा। उनके बड़े भाई ने भी संस्कृत में ही पढ़ाई की थी। बीपीएससी और यूपीएससी में भी संस्कृत एक विषय रहा जिसमें काफी अच्छे अंक मिले। संस्कृत ने साहित्य की ओर बढ़ाया और संवेदनशील भी बनाया।

हत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी चिंता का विषय
उन्होंने कहा कि अभी रायगढ़ जिले को समझकर लोगों की जरूरत के हिसाब से काम करेंगे। पुलिस और लोगों के बीच की दूरी को कम करेंगे। प्रार्थी जब भी थाने आए तो उसे डर नहीं होना चाहिए। पुलिस का डर अपराधियों में होना चाहिए। रायगढ़ जिले में हत्याओं का आंकड़ा बढऩे के बारे में चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों को लेकर मर्डर हो रहे हैैं। पारिवारिक और जमीन विवाद में ज्यादा घटनाएं हो रही हैं। इस पर ठोस कार्यप्रणाली विकसित करेंगे। ऐसी घटनाओं को कम करने पर फोकस है।

कई ब्लैक स्पॉट हैं जिन पर काम करना जरूरी
रोजाना हो रहे सडक़ हादसों पर भी एसपी सदानंद कुमार की नजर है। उन्होंने कहा कि थाना क्षेत्रों का निरीक्षण करने के दौरान उन्हें कई ब्लैक स्पॉट नजर आए। इस जगहों का चिह्नांकन करने के बाद हादसों को कम करने की दिशा में काम करेंगे। ट्रैफिक, पीडब्ल्यूडी और थाना प्रभारियों को साथ लेकर इंजीनियरिंग में बदलाव करेंगे।

सूझबूझ और साहस से टाली बड़ी अनहोनी
हाल ही में नारायणपुर में हुई घटना को जीवन में सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति मानते हैं। धर्मांतरण को लेकर एक समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया। एक प्रार्थना स्थल और स्कूल को भी घेर लिया गया था। चर्चा के दौरान श्री कुमार ने बताया कि वहां हालात बहुत खराब होते जा रहे थे। स्थिति संभालने के लिए वे पहुंचे। भीड़ को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। लेकिन उन्होंने सूझबूझ, संयम और साहस का परिचय दिया। भीड़ में से एक व्यक्ति ने उनके सिर पर लोहे के पाइप से हमला किया। उनके सिर पर गंभीर चोट आई और वे लहूलुहान हो गए। ऐसी स्थिति में भी वे ड्यूटी करते रहे। पुलिस ने बहुत ही संयम का परिचय दिया, तभी इतनी बड़ी घटना को अनहोनी बनने से टाला। अस्पताल में टांके लगवाने के बाद पट्टी बांधकर वे फिर इसी जगह पर पहुंचे और वापस से काम लोगों को काबू करने में लग गए।

बिहार की माटी में ही है जीवटता
यूपीएससी और देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में बिहार के युवाओं की कामयाबी का आंकड़ा बहुत चौंकाता है। उस राज्य में ऐसा क्या है जो दूसरे राज्यों के लिए शोध का विषय है। इस पर उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं में महत्वाकांक्षा और आगे बढऩे कर जुनून बहुत अधिक होता है। वहां आजीविका के विकल्प भी कम होते हैं। पहले से सफल लोगों और इतिहास को देखकर प्रेरित होते हैं। इसीलिए बिहार के युवा बहुत आगे निकलते हैं। मेहनत करने से बिहार के युवा घबराते नहीं हैं।

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ऐसी रही छग में पोस्टिंग
Raigarh News आईपीएस के लिए चयन होने के बाद छग कैडर मिला। ट्रेनिंग के बाद गौरेला थाने में ड्यूटी की। इसके बाद चांपा एसडीओपी, एडिशनल एसपी दुर्ग, एसपी बलौदाबाजार, एसपी एसटीएफ, एसपी नक्सल ऑपरेशन सुकमा, एसपी बलरामपुर, एसपी सरगुजा, एसपी ईओडब्ल्यू एसीबी, 16 वीं बटालियन के कमांडेंट नारायणपुर, एसपी बालोद, एसपी नारायणपुर रहने के बाद अब रायगढ़ में पोस्टिंग हुई है।

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