समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाने सिविल इंजीनियर से IPS बनें योगेश पटेल,एक नजर CSP योगेश कुमार पटेल,जाने क्या कहते हैं नगर पुलिस अधीक्षक….*

आम जनता और पुलिस के बीच सेतु बनने से होगा क्राईम फ्री रायगढ़ : योगेश कुमार पटेल
RGHNEWS प्रशांत तिवारी रायगढ़, 5 अक्टूबर। कुछ अलग कर गुजरने का जुनून हो तो छोटे से गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला छात्र भी खाकी वर्दी की आन-बान और शान बढ़ाते हुए कामयाब अफसर बन सकता है। हम बात कर रहे हैं रायगढ़ के नए सीएसपी योगेश कुमार पटेल की। योगेश पहले सिविल इंजीनियर थे, लेकिन समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े शख्स को न्याय दिलाने की चाह में ये आईपीएस बन गए।
अविभाजित मध्यप्रदेश के पिथौरा के पास ग्राम राजासेवई खुर्द में रहने वाले शासकीय स्कूल के व्याख्याता हरिकृष्ण पटेल और श्रीमती भाग्यवती पटेल के घर 30 अगस्त 1990 को जन्म हुआ योगेश कुमार पटेल का। दो भाइयों में बड़े योगेश की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा यानी कक्षा पहली से पांचवीं तक कि पढ़ाई गांव के ही सरकारी पाठशाला में सीमित संसाधनों के बीच हुई। चूंकि, योगेश कुशाग्र बुद्धि के थे, इसलिए जवाहर नवोदय विद्यालय सराईपाली में चयनित होते ही छठवीं से बारहवीं की तालीम गणित विषय लेकर पूरी की। इसके बाद राजधानी रायपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में 2008 से 12 तक चार साल सिविल इंजीनियरिंग की तालीम हासिल की। नतीजतन, मध्यप्रदेश के सिंगरौली में कोल इंडिया लिमिटेड में बतौर सिविल इंजीनियर के रूप में 2012 से 18 तक 6 वर्ष सेवारत रहे। इस बीच कॉम्पटीशन एग्जाम भी फाइट करते रहे।
2018 में यूपीएससी एग्जाम ने बदली तकदीर*
सरकारी स्कूल के लेक्चरर के बड़े बेटे योगेश कुमार पटेल भले ही टेक्निकल लाईन में जाकर सिविल इंजीनियर बन गए थे, लेकिन मन में बहुत कुछ चल रहा था। यही वजह रही कि 2018 में यूपीएससी परीक्षा में सफलता के बुलंद झंडे गाड़ने के इरादे से जी तोड़ तैयारी करने के सुखद परिणीति स्वरूप सलेक्शन होते ही इनके सपनों के पंख को परवान मिल गया। बीते अगस्त महीने में हैदराबाद में आईपीएस की कड़ी ट्रेनिंग के बाद योगेश की प्रशिक्षु के रूप में पहली पदस्थापना रायगढ़ में नगर पुलिस अधीक्षक के रूप में हुई है।
पेंटिंग का रखते हैं शौक तो घमंडी लोगों से हैं नफरत*
पेंटिंग का शौक रखने वाले आईपीएस अधिकारी योगेश कुमार पटेल को खाने में चिकन बिरयानी बेहद पसंद है। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन इनके फेवरेट एक्टर हैं। वहीं, मिसाईल मैन पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद को ये अपना रोल मॉडल मानते हैं। शिव खेड़ा की पुस्तक यू कैन विन इनके फेवरेट बुक हैं तो यूपीएससी में चयन होना इनके जिंदगी के सर्वाधिक खुशी के क्षण हैं। यही नहीं, ये ऐसे शख्सों से दूरियां बनाते हैं, जिनका मिजाज घमंडी प्रवृति के होते हैं यानी सहज और सरल स्वभाव के लोग ही इनको भाते हैं।
आईएएस रोमा श्रीवास्तव हैं जीवन संगिनी*
आईपीएस योगेश कुमार पटेल ने विगत 5 दिसंबर 2020 में झारखंड की रोमा श्रीवास्तव का हाथ थामते हुए अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर उन्हें जीवन संगिनी बनाया। श्रीमती रोमा श्रीवास्तव आईएएस हैं और वर्तमान में ये पड़ोसी जिले चाम्पा-जांजगीर में प्रशिक्षु अधिकारी हैं।
जनता और पुलिस के बीच मधुर संबंध बनाने के हैं पक्षधर*
आमतौर पर खाकी वर्दीधारी से जनता खौफ खाती हैं, मगर सीएसपी वाईके पटेल मानते हैं कि पब्लिक और पुलिस के बीच मधुर संबंध हो तो बेहतर है। ऐसा होने से आम जनता भी खुद को जिम्मेदार मानते हुए पुलिस को दिल से मदद करती है। पब्लिक के साथ मिलकर ही पुलिस वास्तव में क्राईम को खत्म कर सकती है। ऐसे में जनता को चाहिए कि वो बेझिझक थाने जाकर पुलिस से अपनी परेशानी शेयर कर सुझाव भी दे ताकि बेहतर पुलिसिंग हो सके।
*रायगढ़ को सुघ्घर रइगढ़ बनाने पर दें जोर*
रियासतकालीन रायगढ़ को सुघ्घर रइगढ़ बनाने के बीच जो भी समस्याएं है, उसका सबसे पहले निदान जरूरी है। जैसाकि यातायात व्यवस्था की दुरुस्ती, खस्ताहाल सड़कों का चमकना और अपराध पर नियंत्रण। बच्चों को भी समझाएं कि वे कानून न तोड़ें, बल्कि नियमों का पालन करें। हालांकि, पुलिस कप्तान अभिषेक मीणा शहर के वार्डों में बीट सिस्टम लागू करते हुए जिलेभर में जनचौपाल भी लगवा रहे हैं। ऐसे में पुलिस भी सड़कों पर दिखते हुए जन समस्या की टोह लेते हुए जनता से जुड़ी रहे तो पुलिस योजनाबद्ध तरीके से पेट्रोलिंग कर अपराधके बढ़ते आंकड़ों को काबू में कर सकती है।
युवाओं को लक्ष्य बनाकर फोकस करने की है जरूरत
सीएसपी की जिम्मेदारी सम्हाल रहे योगेश कुमार पटेल भी मानते हैं कि शॉर्टकट से सफलता का रास्ता नहीं खुलता, बल्कि इसके लिए लक्ष्य बनाकर कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। अगर बुलंद हौसले और इरादे मजबूत हो तो लक्ष्य को फोकस करते हुए मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। असफलता से हार न मानना ही सफलता की सीढ़ी की तरफ अग्रसर करती है वरना ये आज आईपीएस अफसर नहीं बनते और सिविल इंजीनियर ही होते।



