छत्तीसगढ़ न्यूज़ (समाचार)

Chhattisgarh news: बिलासपुर में पटाखों की कीमतों में बड़ा खेल, एमआरपी की कीमतों से दस गुना ज्यादा वसूली

Chhattisgarh news दीपावली के त्योहारी बाजार में पटाखों की खरीदी- बिक्री के बीच एमआरपी का खेल उपभोक्ताओं के लिए वर्षो से परेशानी का कारण बना हुआ है। कई पटाखा उत्पादों पर वास्तविक बाजार कीमत से 10 से गुना तक अधिक अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित होने की बात सामने आती है।

 

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दुकानदार इसी बढ़ी हुई एमआरपी के आधार पर भारी छूट का दावा करते हैं, जबकि ग्राहक वास्तविक कीमत का आकलन नहीं कर पाते। इससे मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि एमआरपी के नाम पर होने वाली इस मनमानी पर निगरानी और नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था प्रशासन के पास भी नही है।

 

बाजार में किसी भी वस्तु की कीमत उसके निर्माण की लागत, परिवहन, वितरण खर्च और कंपनी के निर्धारित लाभ के आधार पर तय की जाती है। उपभोक्ताओं को कीमतों में पारदर्शिता मिले और खुदरा विक्रेता मनमाने दाम न वसूल सकें, इसके लिए अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी अंकित करने की व्यवस्था है। लेकिन दीपावली के दौरान पटाखा बाजार में इस व्यवस्था की उपयोगिता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

 

त्योहारी सीजन में करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाले पटाखा बाजार में कई उत्पादों की एमआरपी वास्तविक बिक्री मूल्य की तुलना में कई गुना अधिक अंकित होने की शिकायतें सामने आती हैं। कुछ उत्पादों पर वास्तविक कीमत से 10 गुना तक अधिक एमआरपी होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में दुकानदार इसी बढ़ी हुई कीमत को आधार बनाकर ग्राहकों को 10 से 50 प्रतिशत तक छूट देने का दावा करते हैं। ग्राहक भी भारी छूट देखकर इसे फायदे का सौदा समझ लेते हैं, इसके बावजूद ठगे जाते हैं।

 

उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एमआरपी, पैकिंग और बिक्री मूल्य की जांच जरूरी है। शासन प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है पटाखा बाजार में मूल्य संबंधी नियमों की जांच कराने की मांग उठ रही है, ताकि छूट के नाम पर ग्राहकों को भ्रमित करने और अनुचित मुनाफा कमाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके।

 

कार्रवाई एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने तक सीमित

 

Chhattisgarh newsनापतौल विभाग की कार्रवाई का दायरा मुख्य रूप से अंकित एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने तक सीमित है। यानी पैकेट पर छपी कीमत से कम में बक्री करने पर विभाग को आपत्ति नहीं होती, लेकिन वास्तविक बाजार मूल्य से कई गुना अधिक एमआरपी अंकित करने के आधार पर होने वाले भ्रामक छूट के खेल पर कार्रवाई का सवाल जटिल है। ऐसे में नर्मािता कंपनियों द्वारा मनमाने तरीके से एमआरपी तय करने की व्यवस्था पर नियंत्रण और जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

 

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