Raigarh News : श्री साईं आनंद विहार कॉलोनी पर सवाल कागज कुछ और, जमीन पर तस्वीर कुछ और नाली और ईडब्ल्यूएस प्लॉट को लेकर भी शिकायत
श्री साईं आनंद विहार कॉलोनी में लेआउट और जमीन पर दिख रही स्थिति को लेकर सवाल; प्लॉट कटने से सड़क हुई संकरी, नाली और ईडब्ल्यूएस प्लॉट को लेकर भी शिकायत

Raigarh News : RGHNEWS @प्रशांत तिवारी रायगढ़। जयरामपाली स्थित श्री साईं आनंद विहार कॉलोनी को लेकर अब स्वीकृत लेआउट और मौके की स्थिति में अंतर का मामला सामने आया है। कॉलोनी के दस्तावेजों में मुख्य सड़क की चौड़ाई 24 मीटर यानी करीब 79 फीट बताई गई है, लेकिन मौके पर यह सड़क करीब 20 फीट चौड़ी ही नजर आ रही है। शिकायतकर्ता ने इसी अंतर को लेकर प्रशासन के सामने सवाल उठाए हैं। मौके पर सड़क के दोनों ओर प्लॉट कटे होने से रास्ता काफी संकरा दिखाई देता है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, कॉलोनी करीब 2.67 हेक्टेयर जमीन पर विकसित की जा रही है। वर्ष 2021 की रायगढ़ विकास योजना में खसरा नंबर 189/1 सहित इस जमीन के एक हिस्से का उपयोग ‘आमोद-प्रमोद एवं हरित क्षेत्र’ के रूप में दर्ज था। बाद में जमीन के उपयोग में बदलाव कर आवासीय-व्यावसायिक उपयोग के लिए लेआउट स्वीकृत कराया गया।
*लेआउट में चौड़ी सड़क, जमीन पर संकरा रास्ता*
मामले में सबसे बड़ा सवाल कॉलोनी की मुख्य सड़क को लेकर है। कागजों में मुख्य सड़क 24 मीटर चौड़ी दर्शाई गई है, लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि मौके पर सड़क की वास्तविक चौड़ाई करीब 20 फीट ही रह गई है। सड़क के दोनों तरफ प्लॉटिंग होने के कारण रास्ता और भी संकरा दिखाई देता है।
मौके पर कॉलोनी के अंदर सड़क बनी हुई है, लेकिन स्वीकृत लेआउट में दिखाई गई चौड़ाई और मौके की स्थिति में अंतर को लेकर शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूरे मामले का दोबारा मौके पर सत्यापन कराने की मांग की है।
*बारिश में पानी निकासी की व्यवस्था पर भी सवाल*
कॉलोनी में नाली और बारिश के पानी की निकासी को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार स्वीकृत लेआउट में नाली निर्माण का प्रावधान है, लेकिन मौके पर कई जगह नाली की स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आती। ऐसे में बारिश के दौरान पानी की निकासी किस तरह होगी, इसको लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
*ईडब्ल्यूएस प्लॉट कहां हैं, मौके पर पहचान मुश्किल*
कॉलोनी के लेआउट में ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आरक्षित प्लॉट को लेकर भी शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर आरक्षित प्लॉटों की पहचान स्पष्ट रूप से नहीं हो रही है। वहीं सीमांकन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि सीमांकन रिपोर्ट में जिन बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, उनकी मौके की वास्तविक स्थिति से भी जांच की जरूरत है। इसी वजह से शिकायतकर्ता ने संबंधित दस्तावेजों के साथ मौके का दोबारा निरीक्षण और सत्यापन कराने की मांग की है।
*रजिस्ट्री में तीन नाम, पार्टनरशिप में दो नाम होने पर भी सवाल*
मामले में जमीन के स्वामित्व और पार्टनरशिप से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार 22 जनवरी 2024 की रजिस्ट्री में सतीश अग्रवाल, शुभम अग्रवाल और दीपक सिंघानिया के नाम दर्ज हैं। वहीं ‘श्री साईं आनंद विहार’ पार्टनरशिप फर्म से जुड़े दस्तावेजों में राहुल रोहड़ा और नीरज अग्रवाल के नाम बताए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने पार्टनरशिप डीड और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। इन दस्तावेजों की वैधता और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।

*अब जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर*
मामले को लेकर एसडीएम महेश शर्मा के समक्ष शिकायत पहुंची है। शिकायत में कॉलोनी के लेआउट, सड़क की चौड़ाई, नाली, ईडब्ल्यूएस प्लॉट, सीमांकन और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।
SDM ने कहा है कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। संबंधित दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करने के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि कागजों में 79 फीट चौड़ी दिखाई गई सड़क मौके पर करीब 20 फीट कैसे रह गई। अब प्रशासन की जांच में दस्तावेज और मौके की स्थिति का मिलान होने के बाद ही इस अंतर की वास्तविक वजह सामने आएगी।