Crude Oil: अमेरिका-ईरान समझौते का असर! कच्चे तेल की कीमतों में 6% से ज्यादा की भारी गिरावट – RGH NEWS
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Crude Oil: अमेरिका-ईरान समझौते का असर! कच्चे तेल की कीमतों में 6% से ज्यादा की भारी गिरावट

Crude Oil सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद कच्चे तेल के भाव औंधे मुंह गिर गए। ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फिर से शुरू होगी। इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक नियोजित सैन्य हमले को रद्द कर दिया था।

 

 

MCX पर कच्चे तेल के भाव में 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट

MCX पर सोमवार को सुबह 10.11 बजे के आसपास 19 अगस्त की डिलीवरी वाला कच्चा तेल 6.27 प्रतिशत यानी 509 रुपये की भारी गिरावट के साथ 7604 रुपये प्रति बैरल के भाव पर कारोबार कर रहा था। बताते चलें कि पिछले हफ्ते शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतें 8113 रुपये प्रति बैरल के भाव पर बंद हुई थीं, जो आज 324 रुपये टूटकर 7789 रुपये के भाव पर खुली। आज सुबह 09.00 बजे से लेकर 10.11 बजे तक के कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 7588 रुपये के इंट्राडे लो तक पहुंच चुकी थी। जबकि, 7789 रुपये इसका इंट्राडे हाई रहा, जो इसका आज का ओपनिंग प्राइस था।

 

जुलाई में 23 प्रतिशत महंगा हुआ था क्रूड ऑयल

केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने बताया कि जुलाई में लगभग 23% की तेज बढ़त के बाद, सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 5% से ज्यादा गिरकर $80 प्रति बैरल के नीचे आ गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच OPEC+ के प्रमुख उत्पादकों ने प्रोडक्शन कोटा में एक और मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इससे 2023 में की गई प्रोडक्शन कटौती को वापस लेने की योजना पूरी हो गई है और क्षेत्रीय तनाव कम होने पर सप्लाई और बढ़ाने की गुंजाइश भी बन गई है।

 

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सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने ट्रंप से की समाधान की अपील

Crude Oilबताते चलें कि डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सऊदी अरब और मध्य पूर्व के दूसरे अहम सहयोगियों ने अमेरिका से कूटनीतिक समाधान की अपील की है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द से जल्द दोबारा खोलने का समर्थन किया। पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने से अंतरिम शांति समझौता बाधित हुआ और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तथा लाल सागर में सप्लाई का जोखिम बढ़ गया, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं।

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