Chhattisgarh News: पेट्रोल-डीजल का असर, छत्तीसगढ़ में 25 प्रतिशत तक महंगा हो सकता है बस का सफर – RGH NEWS
छत्तीसगढ़ न्यूज़ (समाचार)

Chhattisgarh News: पेट्रोल-डीजल का असर, छत्तीसगढ़ में 25 प्रतिशत तक महंगा हो सकता है बस का सफर

Chhattisgarh News पेट्रोल-डीजल की तेजी से बढ़ रही कीमतों ने आम जनता का बजट बिगाड़ दिया है। कल भी केंद्र की मोदी सरकार ने पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपए लीटर की बढ़ोतरी की है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के चलते दैनिक उपभोग की चीजों के दामों में भी तेजी से देखने को मिल रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ यातायात संघ के पदाधिकारियों ने परिवहन मंत्री केदार कश्यप से मुलाकात कर यात्री किराए में वृद्धि करने की मांग की है।

 

बस किराए में 25% तक बढ़ोतरी संभव

मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के पदाधिकारियों ने आज परिवहन मंत्री केदार कश्यप से मुलाकात कर बस किराए में वृद्धि करने की मांग की है। इस मुलाकात के बाद बताया जा रहा है कि बस किराए में 25% तक बढ़ोतरी की जा सकती है। परिवहन मंत्री से मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ यातायात संघ के पदाधिकारियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि डीजल के दाम बढ़ने से बस किराए में वृद्धि जरूरी है। पंद्रह दिनों में डीजल के दाम में लगभग 8 रुपए तक वृद्धि हो चुकी है। बता दें कि साल 2021 में आखिरी बाद प्रदेश में बस किराए में वृद्धि की गई थी।

 

2022 के बाद से उच्चतम स्तर पर पेट्रोल-डीजल का रेट

बता दें कि इस वृद्धि के बाद, पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब मई, 2022 के बाद से उच्चतम स्तर पर हैं। ईंधन के दाम में अप्रैल, 2022 से कोई कोई वृद्धि नहीं हुई थी। हालांकि, मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गयी थी। आखिरी बार कीमतों में वृद्धि अप्रैल, 2022 में हुई थी। सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) का कुल मिलकर देश के लगभग 90 प्रतिशत ईंधन बाजार पर नियंत्रण है।

 

ईंधन के दाम बढ़ने के बाद कीमतों में दबाव तय

Chhattisgarh Newsपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि घाटा प्रतिदिन लगभग 600 करोड़ रुपये तक कम हो गया है। यह 15 मई से पहले 1,000 करोड़ रुपये था। उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि हाल के मूल्य संशोधन इस तरह से किए गए हैं कि पेट्रोलियम कंपनियों पर दबाव कुछ हद तक कम हो, लेकिन इससे महंगाई में तेज झटका न लगे। हालांकि, इन बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव बढ़ना तय है। रेटिंग एजेंसी इक्रा लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘‘खुदरा ईंधन की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोलियम विपणन कंपनियों का घाटा लगातार ऊंचा बना हुआ है, क्योंकि घरेलू एलपीजी बिक्री में नुकसान बढ़ रहा है और कच्चे तेल के दाम भी अधिक है।’’

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