Chhatisgarh News: सुशासन तिहार में मछली पालन समिति को मिला आधुनिक मछली जाल

Chhatisgarh News: रायपुर, 15 मई 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत कोंडागांव जिले में लगातार जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। शिविर ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ उन्हें शासन की योजनाओं से सीधे जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।
इसी क्रम में सामुदायिक भवन कोण्डागांव में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में मत्स्य पालन विभाग द्वारा मछली पालन सहकारी समिति मर्यादित डी०एन०के०, विकासखंड कोण्डागांव के सदस्यों को आधुनिक मछली पकड़ने के जाल वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान समिति के सदस्य श्री प्रेम चंद राय एवं श्री बसंत सैमुएल को विभागीय योजना अंतर्गत जाल प्रदान किए गए।
हितग्राहियों ने बताया कि संसाधनों की कमी के कारण उन्हें पहले मछली पकड़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, जिससे उत्पादन भी प्रभावित होता था। अब आधुनिक जाल मिलने से मछली संग्रहण कार्य अधिक सुगमता और दक्षता से किया जा सकेगा। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि होने की संभावना है।
मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शासन का उद्देश्य मत्स्य पालकों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। विभाग द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण, उपकरण एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकें और लोगों की आजीविका मजबूत हो।
सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाएं अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। शिविरों में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निराकरण किया जा रहा है तथा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न विभागीय योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। इससे आमजन में शासन के प्रति विश्वास भी बढ़ा है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा दिए जा रहे सहयोग से उनकी आजीविका को नई मजबूती मिली है और भविष्य में वे बेहतर उत्पादन कर आर्थिक रूप से और सशक्त बन सकेंगे।



