Income Tax Rules 2026 Notified: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे Income Tax से जुड़े ये नियम, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन – RGH NEWS
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Income Tax Rules 2026 Notified: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे Income Tax से जुड़े ये नियम, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

Income Tax Rules 2026 Notified नए आयकर कानून को धरातल पर उतारने की दिशा में Income-tax Rules, 2026 को आधिकारिक तौर पर नोटिफाई कर दिया गया है. ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे. अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, आपने कोई प्रॉपर्टी खरीदी है या आपके पास अलग-अलग तरह की संपत्तियां हैं, तो यह खबर सीधे तौर पर आपके लिए है. दरअसल, ये नियम Income-tax Act, 2025 के तहत टैक्स कैलकुलेशन का पूरा ढांचा तय करने वाले हैं. यानी, आने वाले समय में आपकी कमाई, संपत्ति की बिक्री और निवेश पर टैक्स की गणना का तरीका पूरी तरह से पारदर्शी और नया होने जा रहा है.

 

 

क्या है नया फॉर्मूला?

किसी भी संपत्ति पर लगने वाला टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने उसे कितने समय तक अपने पास रखा है. आर्थिक भाषा में इसे ‘होल्डिंग पीरियड’ कहा जाता है. सरकार ने नए नियमों में इस मियाद को लेकर स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है. मान लीजिए कि आपने किसी कंपनी के बॉन्ड, डिबेंचर या डिपॉजिट सर्टिफिकेट में पैसा लगाया था और कुछ समय बाद वह निवेश शेयरों में तब्दील (कन्वर्ट) हो गया. ऐसे में निवेशक अक्सर इस उलझन में रहते थे कि उनका होल्डिंग पीरियड कब से गिना जाएगा. अब नए नियम के मुताबिक, यह समय केवल उस दिन से नहीं गिना जाएगा जब से निवेश शेयर में बदला है. इसके बजाय, आयकर विभाग उस पूरी अवधि को जोड़ेगा जब से आपने वह मूल बॉन्ड या डिबेंचर खरीदा था. इससे निवेशकों को पुरानी अवधि का फायदा मिलेगा.

 

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जमीन से लेकर मकान तक के नियम तय

सरकार ने Income Declaration Scheme (IDS), 2016 के तहत संपत्तियों की जानकारी देने वालों के लिए भी तस्वीर साफ कर दी है. अगर किसी व्यक्ति ने इस स्कीम के तहत कोई अचल संपत्ति (जैसे जमीन, प्लॉट या मकान) घोषित की थी, तो उस पर टैक्स की गणना के लिए होल्डिंग पीरियड उसकी खरीद की वास्तविक तारीख से ही माना जाएगा. हालांकि, इसके लिए एक शर्त यह रखी गई है कि उस संपत्ति की रजिस्टर्ड डीड (दस्तावेज) मौजूद होनी चाहिए. वहीं, अगर अचल संपत्ति के अलावा कोई अन्य एसेट है, तो उसके लिए होल्डिंग पीरियड की शुरुआत 1 जून 2016 से मानी जाएगी. इस स्पष्टीकरण से पुरानी संपत्तियों को बेचने पर लगने वाले टैक्स को लेकर वर्षों से चले आ रहे भ्रम दूर होंगे.

 

 

शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म का झंझट खत्म

जब कोई विदेशी कंपनी भारत में काम कर रही अपनी शाखा को एक पूर्ण सब्सिडियरी (सहायक कंपनी) में बदलती है, तो संपत्तियों का ट्रांसफर होता है. नए नियमों में यह तय किया गया है कि ऐसी स्थिति में ट्रांसफर किए गए एसेट्स का होल्डिंग पीरियड भी जोड़ा जाएगा. यानी, संपत्ति जब विदेशी शाखा या उसके मूल मालिक के पास थी, उस पुरानी अवधि को भी टैक्स गणना में शामिल किया जाएगा.

 

Income Tax Rules 2026 Notifiedइसके साथ ही, निवेशकों के लिए एक और राहत कैपिटल गेन के वर्गीकरण में दी गई है. अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कौन सा मुनाफा शॉर्ट टर्म (अल्पावधि) होगा और कौन सा लॉन्ग टर्म (दीर्घावधि). यदि मुनाफा ‘ब्लॉक ऑफ एसेट्स’, खुद से तैयार की गई संपत्ति (जैसे बिजनेस की गुडविल) या शॉर्ट टर्म नेचर वाले एसेट्स से हुआ है, तो उसे अनिवार्य रूप से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन ही माना जाएगा. इसके उलट, जो संपत्तियां लॉन्ग टर्म की श्रेणी में आती हैं, उनसे होने वाली कमाई पर लॉन्ग टर्म टैक्स के नियम ही लागू होंगे.

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