मनोरंजन

*✍️भारत मे पुरूष की अपेक्षा शादी-शुदा महिलाएं बाहर कर रही है प्यार और सेक्स की तलाश,आखिर क्या है इसकी वजह कही पुरूष तो नही इसके लिए जिम्मेदार…*

RGHNEWS बेवफाई भारत में हमेशा कानूनी और मोरल विषय रहा है, लेकिन नियम अक्सर पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग रहे हैं. कुछ समय पहले तक भारत में पुरुष अपनी पत्नियों के दूसरे पुरुष के साथ संबंध रखने के लिए पुरुष और महिला पर मुकदमा चला सकते थे, एडल्ट्री क़ानून के ख़त्म होने के बाद ऐसा नहीं हो सकता. एक हालिया सर्वेक्षण में पाया गया है कि भारत में अधिक महिलाएं शादी के बाद भी बाहर रिलेशनशिप रख रही हैं और उनमें से अधिकांश माएं थीं. फ्रांसीसी एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप ‘ग्लीडेन’ द्वारा एक सर्वे शुरू किया गया था, ये ऐप एक महिला द्वारा महिलाओं के लिए विकसित किया गया है.

इसका उद्देश्य महिलाओं, विशेष रूप से उन लोगों के लिए बनाया गया है जो अपनी शादी में खुश नहीं हैं और बाहर ख़ुशी, प्यार, फ्रेंडशिप, सेक्स, की तलाश कर रहे हैं. इस ऐप के वर्तमान में भारत में 13 लाख यूजर्स हैं.

यह सर्वेक्षण पूरे भारत में 30-60 आयु वर्ग की शहरी, शिक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिलाओं के दृष्टिकोण को दर्शाता है, इस सर्वे में 48 प्रतिशत भारतीय महिलाएं विवाहेतर संबंध रखने वाली पायी गई, वे न केवल सिर्फ विवाहित थीं, बल्कि उनके बच्चे भी थे. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित सर्वेक्षण के निष्कर्ष के अनुसार 64 प्रतिशत महिलाएं जो शादी के बाद सेक्स की कमी या अपने पार्टनर द्वारा सैटिसफाईड न होने के कारण एक्स्ट्रा मैरीटल अफेयर में लिप्त पायी गईं. :

रिपोर्ट के अनुसार शादी से बाहर प्रेम की तलाश कर रही 76 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित थीं, जबकि 72 प्रतिशत आर्थिक रूप से स्वतंत्र थीं

हालांकि पुरुष भी बेवफा होते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति में महिलाओं के लिए बेवफाई को पूरी तरह से वर्जित माना जाता था. उदाहरण के लिए, भारत में हाल ही में डिक्रिमाइज्ड और बिलकुल विचित्र अडल्ट्री कानून पर रोक लगा दी, जिसके बाद कोई भी महिला या पुरुष अपने पार्टनर के खिलाफ मुकदमा नहीं चला सकते. सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट नेअडल्ट्री को हतोत्साहित कर दिया, जिससे यह एक कानूनी अपराध न होकर नागरिक अपराध बन गया जो तलाक का आधार बन सकता है. :

इस तरह कानून में बदलाव के कारण दृष्टिकोण में बदलाव आया है, जिसके बाद महिलाओं में कामुकता और अपने स्वयं के शरीर के बारे में जागरूकता बढ़ी है, जिसके परिणामस्वरूप, बेवफाई को लेकर लोगों की सोच बदल रही है. महिलाओं को अब उनके पति उन्हें अपनी संपत्ति नहीं समझते हैं. विशेषाधिकार प्राप्त महिलाओं ने भी विवाह में समानता का दावा करना शुरू कर दिया है.

सवाल यह नहीं है कि अधिक महिलाएं धोखा दे रही हैं या नहीं, लेकिन शादी में जोड़ों को धोखा देने की आवश्यकता क्यों है? पुरुष दुनिया भर में महिलाओं की तुलना में अधिक धोखा देते हैं और फिर भी उनके आयु समूह या उनकी अभिभावक स्थिति के बारे में कोई सवाल नहीं उठाया जाता है. ग्लीडेन द्वारा किए गए ऐसे अध्ययनों पर सवाल उठाना चाहिए, यही कारण है कि विवाह के बाद संबंध बनाने वाली महिलाएं ऐसा करती हैं, क्योंकि यौन और भावनात्मक पूर्ति की मांग करना एक शादी में दोनों पक्षों का समान अधिकार है.

ख़बर शेयर करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button