*✍️RGHNEWS ब्रेकिंग: महामारी की तीसरी लहर में बच्चे संक्रमित हुए तो मां-बाप क्या करेंगे, SC ने केंद्र से पूछे ये अहम सवाल ….*

RGHNEWS कोरोना महामारी के बीच ऑक्सीजन की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चिंता जताई। अदालत ने केंद्र से कहा कि वैज्ञानिक कोरोना की तीसरी लहर की बात कह रहे हैं। उसमें बच्चों के प्रभावित होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में मां-बाप क्या करेंगे। अदालत ने केंद्र से इसका प्लान पूछा। साथ ही कहा कि टीकाकरण अभियान में बच्चों के लिए भी सोचा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि तीसरी लहर आनी बाकी है। ऐसे में दिल्ली में ऑक्सीजन का संकट नहीं होना चाहिए। सरकार को देशभर में ऑक्सीजन सप्लाई पर ध्यान देना चाहिए। अदालत ने कहा कि ऑक्सीजन का ऑडिट करवाने और इसके अलॉटमेंट के तरीके पर फिर से विचार करने की जरूरत है।
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: 4 मई को दिल्ली के 56 प्रमुख अस्पतालों में किए गए सर्वे में यह सामने आया कि वहां लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) का काफी स्टॉक है। राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य भी ज्यादा ऑक्सीजन सप्लाई की मांग कर रहे हैं। अगर दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देंगे तो दूसरे राज्यों की सप्लाई में कटौती करनी होगी।
जस्टिस डी वाय चंद्रचूड: आज से सोमवार के बीच क्या होगा? आपको ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ानी चाहिए। दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देनी ही चाहिए। इस वक्त हेल्थ प्रोफेशनल पूरी तरह थक चुके हैं। आप बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे सुनिश्चित करेंगे?
सॉलिसिटर जनरल: हम दूरदराज के गांवों को लेकर भी चिंतित हैं। दिल्ली का ऑक्सीजन ऑडिट होना चाहिए। किसी को सिर्फ इसलिए तकलीफ नहीं हो कि वह जोर से नहीं बोल पा रहा है।
जस्टिस चंद्रचूड: चिंता की बात है कि कोरोना की तीसरी लहर की बात वैज्ञानिक कह रहे हैं। उसमें बच्चों के प्रभावित होने की आशंका है। टीकाकरण अभियान में बच्चों के लिए सोचा जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई दौरान कोर्ट ने केंद्र से सवाल करा कि कोरोना की तीसरी लहर में अगर बच्चे संक्रमित होते है तो मां बाप कैसे क्या करेंगे, क्योंकि बच्चे तो अस्पताल खुद नहीं जा सकते. अस्पताल में रहेंगे या क्या करेंगे. क्या प्लान है, टीकाकरण किया जाना चाहिए, हमें इसके साथ निपटने की जरूरत है. सर्वोच्च अदालत ने इस दौरान कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चिंता व्यक्त की और उसको लेकर अभी से तैयारियां करने पर ज़ोर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीसरी लहर की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी हमें अभी से करनी होगी, युवाओं का टीकाकरण शुरू हो गया है. अगर बच्चों पर असर बढ़ता है तो कैसे संभाला जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आज हमारे देश में करीब डेढ़ लाख ऐसे डॉक्टर हैं, जो नीट (एनईईटी) एग्जाम की तैयारी में जुटे हुए हैं. करीब ढाई लाख नर्स घरों में बैठी हैं. ये वहीं लोग हैं जो तीसरी लहर के वक्त हमारी व्यवस्था को मदद कर मजबूत करेंगे. उन्होंने कहा कि हमारे स्वास्थ्यकर्मी 2020 से बिना थके लगातार काम कर रहे है. ऐसे में उन पर भी दबाव ज्यादा है.
आपको बता दें कि तीसरी लहर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई करने कारण केंद्र सरकार के वैज्ञानिक सलाहकारों के द्वारा कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी है. बीते बुधवार को केंद्र सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा कि तीसरी लहर का आना निश्चित है, लेकिन वो कब आएगी और कितनी खतरनाक ये अभी नहीं बता सकते हैं. कोरोना वायरस के वैरिएंट लगातार बदल रहे हैं, इसलिए हमें तीसरी लहर के लिए भी तैयार रहना होगा.



