*✍️कैसे पता लगाए की आपका इम्युनिटी सिस्टम कमजोर है या नही, जाने कुछ संकेत से…*

RGHNEWS देश में भारत बायोटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी और टीकाकरण भी शुरू हो चुका है. वैज्ञानिकों का दावा है कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है, हालांकि साथ में ये भी जोड़ा जा रहा है कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग फिलहाल कोवैक्सीन लेना टालें. विदेशों में भी अलग-अलग दवा कंपनियां यही बात दोहरा रही हैं.
इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड,
जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो. ट्रायल में ऐसे लोगों पर वैक्सीन का असर अपेक्षाकृत कम देखा गया है. आमतौर पर, कीमोथेरेपी करा रहे कैंसर के मरीज, एचआईवी पॉजिटिव लोग और स्टेरायड लेने वाले लोग इम्युनो-सप्रेस्ड होते हैं. यानी इनकी इम्युनिटी कमजोर होती है
कैसे समझें कि आप इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड है,यानी आपका इम्युनिटी सिस्टम कमजोर है?
इसके कई संकेत हैं, जिनमें सबसे पहला तो है बार-बार बीमार होना. अगर कोई लगातार और लंबे समय तक के लिए बीमार हो तो उसका इम्यून सिस्टम कमजोर माना जाता है. ज्यादातर मामलों में कमजोर इम्युनिटी के कोई शारीरिक लक्षण नहीं होते हैं. तब भी कुछ ऐसे संकेत हैं, जिनपर ध्यान देना आपको इसे समझने में मदद कर सकता है.
बार-बार पेट खराब होना इसका बड़ा लक्षण है. अगर किसी को बार-बार डायरिया हो रहा है या फिर लगातार कब्जियत बनी हुई है तो ये इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होने का संकेत है.
अगर कुछ खाने-पीने से जल्दी ही इंफेक्शन हो जाता है, तब भी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है. पैनमेडिसिन के मुताबिक शोध में साफ हो चुका है कि ऐसे लगभग 70 प्रतिशत मामलों में मरीज इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड पाया गया.
अगर जख्मों को भरने में सामान्य से ज्यादा समय लगे तो ये साफ है कि मरीज की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कमजोर है. अमेरिकन एकेडमी ऑफ एलर्जी अस्थमा एंड इम्युनोलॉजी ने इस बात को खतरे का संकेत बताते हुए लो-इम्युनिटी से जोड़ा.
अगर किसी को साल में तीन से चार बार कानों से जुड़ा संक्रमण हो तो भी इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
इन संकेतों पर ध्यान देने के अलावा कई तरह की जांचें भी हैं जो ये पक्का कर सकती है कि कोई कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता का शिकार है या नही