मनोरंजन

*✍️कभी आपने सोचा है बर्ड फ्लू की चपेट में सबसे पहले मुर्गे-मुर्गियां, कौए, कबूतर और बतख आदि ही क्‍यों आते हैं, जबकि पक्षियों की तो हजारों प्रजातियां हैं, जानिए पक्षी विशेषज्ञ से…*

RGHNEWS नई दिल्‍ली. बर्ड फ्लू बीमारी का प्रकोप पिछले कुछ साल में आम हो गया. लगभग हर तीन से पांच साल के बाद बर्ड फ्लू यानि एवियन इन्‍फ्लूएंजा  की चपेट में आकर मुर्गी, कौए, कबूतर और बतखों के मरने का सिलसिला शुरू हो जाता है. इतना ही नहीं पॉल्‍ट्री फार्म में मौजूद मुर्गियां जिन्‍हें चिकन (खाने के लिए मांस) के रूप में बेचने के लिए पाला जाता है, इनमें बीमारी फैल जाती है. और बीमार मुर्गी के संपर्क में आई सभी मुर्गियों को भी बर्ड फ्लू के के डर से जिंदा दफना दिया जाता है. पक्षी विशेषज्ञ एन शिवकुमार बताते हैं कि बर्ड फ्लू भी कोरोना की तरह ही फैलने वाला रोग है. हालांकि कोरोना अब इंसान से इंसान में फैल रहा है वहीं बर्ड फ्लू अभी तक पक्षियों से पक्षियों में ही है.देशभर में बर्ड फ्लू से कौओं की मौत बढ़ती जा रही हैैै .

यह भारत में अभी इंसानों में नहीं पहुंचा है लेकिन इसका फैलाव और श्‍वसनतंत्र पर प्रभाव कोरोना के साथ-साथ टीबी (TB) जैसा भी है. बर्ड फ्लू सबसे पहले उन पक्षियों को पकड़ता है जिनकी इम्‍यूनिटी कमजोर है. जिसकी इम्‍यूनिटी मजबूत है, उसे बर्ड फ्लू बीमार नहीं कर पाता.कौओं, मुर्गियों और बतखों की बात करें तो शहरों में रहने वाले सभी पक्षी कमजोर इम्‍यूनिटी वाले होते हैं. शहरों में वायु, जल और ध्‍वनि प्रदूषण के चलते ये पक्षी कमजोर होते जाते हैं. वहीं इनके खाने-पीने की चीजें भी अशुद्ध होती हैं जो इन्‍हें अंदर से कमजोर कर देती हैं. कौए कहीं से भी कुछ भी उठा के खा लेते हैं. कबूतरों के लिए सड़कों पर वायु प्रदूषण के बीच में अनाज डाला जाता है. कई-कई दिनों का गंदा पानी ये पीते हैं. वहीं पानी के तालाबों में भी प्रदूषण के कारण बतखें बीमार रहती हैं. यही वजह है कि बर्ड फ्लू जंगल में कम जबकि शहरी पक्षियों में तेजी से फैलता है और सबसे जल्‍दी चपेट में कौए, कबूतर, बतख आ जाती हैं.

ख़बर शेयर करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button