कोरबा

बेजा कब्जा हटाने तहसीलदार के काप रहे है हाथ, अधिकारी है मौन, ग्राम खोखरा का है मामला,पूर्व कलेक्टर के आदेश पर हुई थी कार्रवाई, बेजाकब्जाधारियों को दिया गया था नोटिस, राजस्व विभाग को बेजाकब्जाधारी करोड़ो का चुना लगाकर दिखा रहे ठेंगा,

 

राजेश्वर तिवारी जांजगीर चाम्पा – जिला मुख्यालय से लगे ग्राम खोखरा में जिला प्रशासन द्वारा धाराशिव चौक में सबसे बड़ी कार्रवाई की थी , जिसमे 40 से 50 बेजाकब्जाधारियो को नोटिस मिला था , तहसील न्यायालय द्वारा नोटिस देकर कोर्ट में उपस्थित होने को कहा गया था , जिसमे 40 से 50 बेजाकब्जाधारी तहसील न्यायालय में पेश हुए थे , वही उन कब्जाधारियों से जुर्माना भी लिया गया था , सभी को जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया था मगर उनके द्वारा जवाब अभी तक प्रस्तुत नही किया गया न तो तहसीलदार ने उन लोगो को दोबारा न्यायालय में पेश होने को कहा , 6 माह बीत चुके है मगर आज तक इस मामले में आगे कोई कार्रवाई करने की नही सोची तो वही बेजाकब्जाधारियों और औने पौने दाम में शाशकीय जमीन बेचने वालों के हौसले इस तरह बुलंद हो गए है कि न तो उनको जिला प्रशासन का खौफ है न तो कानून का डर, दिसम्बर माह 2019 में जिला के पूर्व कलेक्टर के निर्देश पर यह कार्रवाई हुई थी , आज 6 माह बीत गए मगर तहसील के अधिकारी इन बेजाकब्जाधारियों के ऊपर ऐसे मेहरबान है की उस जमीन में हाथ लगाने से भी डर रहे है यहा तक के हाथ लगाने का नाम भी नही ले रहे है , यदि जिला प्रशाशन के गैर जिम्मेदार अधिकारी ऐसे मामलों को लेकर डरने लगे तो फिर इससे ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग के ही आलाधिकारी राजस्व को चुना लगाने का काम कर रहे हैं , आपको बात दे कि ग्राम पंचायत खोखरा में कम से कम 14 से 15 हजार की जनसंख्या है , इस गाँव की अजब ही कहानी है यहां बेजाकब्जाधारी तालाब के पार को भी नही छोड़ रहे हैं , बिसगरी तालाब,मनसा तालाब और ऐसे कई तालाब है जो बेजाकब्जाधारी साल दो साल के अंदर तालाब के पार को भी नही छोड़ा हैं घर बनाकर कब्जा कर लिए है, गांव के तालाबो की सही तरीके से मौके पर निरीक्षण अधिकारियों द्वारा किया जाए तो स्पष्ट मकान बना हुआ दिखेगा , जितने भी तालाब के पार में लोग मकान बनाए हैं इसकी जानकारी पंचायत को है, सरपंच के मना करने के बावजूद गाँव के ही कब्जाधारी उसकी बात नही मान रहे है, बेधड़क कब्जा कर रहे है, बेजाकब्जाधारीयो के हौसले इस तरह बुलंद हो चुके है की बेजा कब्जा करते देख उसी गांव के ही लोग भी जमीन को कब्जा करने से नही चूक रहे है, कब्जा कर औने पौने दामो में शाशन की जमीन को बेचने में समय भी नही लगा रहे है बिचौलियों के बीच साठ गाठ कर बेच रहे है , शाशकीय जमीन की कोई लिखापढ़ी नही होती , यह जमीन दलालो के माध्यम से बिक जाता हैं जिसमे दलालो का भी इसमें कमीशन रहता हैं, हम बात कर रहे है तहसील जांजगीर के ग्राम खोखरा जेलबिल्डिंग से लेकर धाराशिव चौक तक की जहा रोड किनारे की जमीन करोड़ों अरबो की हैं , ऐसा नही है कि जिले के आला अधिकारियो को इस बात की जानकारी नही है ,यह बात की जानकारी सभी को है , मगर गांव के बेजाकब्जाधारी कर्ज से मुक्त होने के लिए शाशन की जमीन को बिचौलियों के बीच औने – पौने दाम में बेच रहे हैं जिससे शाशन को करोड़ों का चूना लग रहा है, वही लेने वाले भी गाँव के ही निवासी है , जिसमे ग्राम खोखरा की घास भूमि जमीन में दूसरे गांव से आए लोग और गाँव के ही ग्रामीणों ने बेखौफ होकर बेजाकब्जा कर लिया है बेजा कब्जा कर मकान को औने पौने दाम में बेचा जा रहा है यह सिलसिला अभी भी जारी है,
बेजाकब्जाधारियों और दलालो द्वारा दबंगई पूर्वक घास भूमि जमीन को अवैध रूप से बिचौलिये के बीच बेचा जा रहा,

दिसम्बर माह में ग्राम खोखरा के धाराशिव मोड़ स्थित रोड किनारे की शाशकीय जमीन में 40 से 50 परिवार के द्वारा बेजा कब्जा किया गया था तहसीलदार जांजगीर की टीम के द्वारा निरीक्षण कर बेजा कब्जा धारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सभी को नोटिस दिया गया था ,करीब 3 एक्कड़ घास भूमि जमीन में बेजा कब्जा की शिकायतें मिली थी जिला मुख्यालय से लगे होने के कारण यहां पर अवैधानिक रूप से बसे लोगों की समूह सामने आई है जिसकी वजह से खोखरा की शाशकीय जमीन में यह समस्या लगातार जारी है बेजा कब्जा धारियों की बढ़ती तादाद की वजह से शिकायत जिला प्रशासन को किए जाने पर कार्रवाई की गई थी पूर्व कलेक्टर के आदेशानुसार 40 से 50 बेजा कब्जा धारियों के खिलाफ नोटिस जारी कर जुर्माना भी लगाया था वही मकान खाली करने को कहा गया था , 6 माह बीतने के बाद भी न तो मकान खाली किया गया और न तो कब्जा हटाया गया ,यह कार्रवाई यही तक सिमट कर राह गई, आगे बेजाकब्जा हाटाने की कार्रवाई नही की गई , अगर 6 माह के भीतर इन सभी बेजाकब्जाधारियों पर कार्रवाई करके मकान को कब्जे से हटा दिया जाता तो आज यह नौबत ही नही आती वही लोग बेजाकब्जा कर मकान बनाना बंद कर देते, मगर यहां तो कुछ और नजारा देखने को मिल रहा है यहा तो आए दिन बेजाकब्जा करने वालो की तादाद बढ़ती ही जा रही है, आपको बता दे कि गाँव में कुछ ऐसे लोग भी है जो कब्जा कर मकान तो बना लिए है वही उस मकान की कीमत 1 से 2 लाख रूपए की कीमत लगाकर गाँव के ही दलालो के माध्यम से बिचौलियों के बीच सौदेबाजी कर बेच रहे है, कुछ बाहर गाँव से भी लोग आकर घास जमीन में बेखौफ कब्जा कर रहे है , घर बनाने के साथ ही साथ कोई बड़ी बड़ी बिल्डिंग बनाकर होटल व चखना सेंटर , मुर्गा दुकान सहित कई अन्य दुकानें बना लिए है , दिसम्बर माह में जब घास भूमि जमीन में बेजा कब्जा करने वाली बात की खबर जब जिला प्रशासन को हुई थी तब जिला प्रशाशन सख्ते में आकर तहसीलदार व आर.आई , पटवारी मौके में पहुचकर निरीक्षण किए थे ,तब पाया गया था कि सही में बाहर व गांव के लोगो के द्वारा बड़ी – बड़ी बिल्डिंगे बना लिए है जिसमें चखना सेंटर , होटल,कबाड़ी दुकान,मुर्गा दुकान खोला गया है, राजस्व विभाग 40 से 50 बेजाकब्जाधारियों को सिर्फ जुर्बाना लेकर छोड़ दिया है,वही मनसा तालाब के पार में भी कार्रवाई हुई थी इसमें भी नोटिस देकर जुर्माना लेकर छोड़ दिया गया ,कब्जा हटाने की कोशिश भी नही की गई, जबकि इस जमीन की कीमत करोड़ों से भी ज्यादा आंकी जा रही हैं, अगर आगे बेजाकब्जाधारियों के मकान को कब्जे से नही हटाया गया वही मकान बेचने वालों के ऊपर कार्रवाई नही हुई तो जितने भी खाली जमीन बचे हैं वह भी नही बचेगा और राजस्व को आज करोड़ों रुपए का चूना तो लगा ही है वही भविष्य में अरबो रुपए का भी चुना बेजाकब्जाधारी लगा सकते है,

इसी तरह कब्जाधारियों का एक समूह खोखरा जेल बिल्डिंग के पास भी हैं, फोर लेन के बगल में खोखरा रोड किनारे में कम से कम गांव के ही 30 से 40 ग्रामीणों द्वारा भी इसी तरह कब्जा कर बिल्डिंग व मकान बना लिए हैं अगर सही तरीके से जाँच की जाए तो कई अवैध कब्जाधारी सामने आएंगे , ज्यादातर जमीन पर कब्जा खोखरा जेल के आगे रोड से शुरू होता है व सूर्या चौक तक खत्म होता है , खोखरा मेन रोड किनारे जमीन की कीमत करोड़ो में आकि जा रही है, अगर इन जमीनों से बेजाकब्जाधारियों को नही हटाया गया तब राजस्व को करोड़ों का चूना लगेगा, दलालो की माने तो इन दिनों दलालो के माध्यम से कब्जा किए हुए मकान को औने पौने दाम में बेच दे रहे हैं वही गाँव के ही कुछ दलालो के द्वारा बाहर से आए लोगो से सौदे बाजी कर ज्यादा दाम में बेच कर अधिक मुनाफा कमाने के लिए अपनी जेब भरने में लगे हैं , बेजाकब्जाधारियो व दलालो कि तो चांदी ही चांदी हो गई हैं, बेजाकब्जाधारी व दलाल राजस्व विभाग के खजाने में डाका डालने पर भी नही चूक रहे हैं वही अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न करके अधिकारी ही चोर को चाबना सिखा रहे है, अगर इन पर कार्रवाई नही हुई तो कल फिर से वही काम होगा, फिर किसी शाशकीय जमीन पर डाका डालेंगे और जिला प्रशासन व राजस्व विभाग को ठेंगा दिखाते हुए बेजाकब्जाधारी व दलाल अपनी जेब हमेशा इसी तरह भरते रहेंगे, वही जिला प्रशासन के आला अधिकारी तमाशा देखते रहेंगे और हाथ पे हाथ धरे बैठे रहेंगे,

 

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