फ्री-फ्री-फ्री एक रुपये में घर भर लो’, ‘लाइफटाइम वारंटी’, ‘एक के साथ एक फ्री’ और 7 दिन में गोरा करने वाली क्रीम,अब ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर होगी कार्यवाही

Misleading Ad and Misleading Endorsement Guidelines: आपने कई विज्ञापनों में पढ़ा और देखा होगा, वहां फ्री-फ्री-फ्री लिखा होता है, लेकिन जब आप इस चीज को लेने जाते हैं तो फ्री जैसा कुछ नहीं होता
एक रुपये में घर भर लो’, ‘लाइफटाइम वारंटी’, ‘एक के साथ एक फ्री’ और 7 दिन में गोरा करने वाली क्रीम जैसे कई अन्य विज्ञापन भी आपने पढ़े होंगे. लेकिन जिन चीजों को एक के साथ एक फ्री बताया जाता है, उनकी कीमत बढ़ाकर वसूली जाती है और लाइफटाइम वारंटी के नाम पर 4-5 साल की वारंटी मिलती है, इसी तरह से एक रुपये में घर लो, और सिर्फ एक रूपये में किसी चीज को देने के विज्ञापन में छोटे-छोटे अक्षरों में नियम और शर्तें लागू भी लिखा रहता है. अब इस तरह के विज्ञापनों पर कड़ी कार्रवाई होगी. केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे विज्ञापनों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. ऐसे किसी भी विज्ञापन को मिसलीडिंग एड, अनफेयर प्रैक्टिस या मिसलीडिंग क्लेम कहा जाता है.
ऐसे विज्ञापनों के झांसे में आकर उपभोक्ता जब इन चीजों को खरीदने जाता है तो ठगा हुआ महसूस करता है. आप ठगा हुआ महसूस न करें, इसके लिए सरकार ने यह गाइडलाइन जारी की हैं. आइए जानते हैं सरकार द्वारा जारी मिसलीडिंग एड एंड मिसलीडिंग एंडोर्समेंट गाइडलाइन में क्या कुछ है.
सिर्फ 8 प्वाइंट में समझें इन गाइडलाइंस का क्या मतलब है
- सबसे पहले सबसे जरूरी बात – Misleading Ad क्या है? किसी भी उत्पाद या सेवा के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी देना, ऐसा क्लेम करना जो उस उत्पाद से नहीं मिलता, या उत्पाद के बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना मिसलीडिंग एड की कैटेगरी में आता है.
- अब बात क्यों जारी की गई नई गाइडलाइंस? ताजा गाइडलाइंस को जारी करने के पीछे सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना है. इसके अलावा व्यापार के गलत तरीकों (Unfair Trade Practice) पर रोक लगाना और भ्रामक दावों (Misleading Claims) पर रोक लगाना है.
- किन पर लागू होते हैं नए नियम? नए नियम निर्माताओं (Manufacturer) सेवा प्रदाताओं (Service Provider) और ड्यूटीज सभी पर लागू होता है. इसमें सभी माध्यमों के विज्ञापन शामिल हैं. नई गाइडलाइन के अनुसार अब निर्माता अपने उत्पाद के बारे में उपभोक्ताओं को सही-सही जानकारी देंगे. उनके उत्पाद के बारे में जिस स्टडी के आधार पर दावा किया गया है, उसके बारे में भी जानकारी देनी होगी.
- कब से लागू होगी नई गाइडलाइन? मिसलीडिंग एड को लेकर जारी की गई नई गाइडलाइन आज से ही लागू हो चुकी है. अब अगर आपको कोई भी मिसलीडिंग एड देखने को मिलता है तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है.
- गलत विज्ञापन या दावे पर क्या कार्रवाई होगी? यदि विज्ञापन में उत्पाद को लेकर गलत दावा किया जाता है तो इसके लिए विज्ञापनदाता के साथ ही विज्ञापनकर्ता और उत्पादक भी किए गए दावे के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होंगे. अगर गलत दावा किया गया है और यह साबित होता है तो इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
- Disclaimers: के लिए नियम क्या हैं? डिस्क्लेमर में उत्पाद और इसके फायदों के बारे में स्पष्ट तौर पर बताना होगा. जो दावा किया गया है वह डिस्क्लेमर में बताना होगा. यदि किसी अन्य विज्ञापन में कुछ कहा गया है और उसे सही बताने के लिए डिस्क्लेमर दिया जा रहा है तो इसे भ्रामक और गलत माना जाएगा. टर्म एंड कंडीशन में अगर किसी चीज को फ्री बताया गया है तो डिस्क्लेमर में भी उसके बारे में फ्री लिखा होना चाहिए.
- ये नियम भी जान लें, आपके काम का है – स्पेशल ऑफर, आधी कीमत में उपलब्ध, मुफ्त ले जाएं, एक रुपये में सेल जैसे विज्ञापन को लेकर उपभोक्ताओं को साफ बताना होगा कि उनके पास उस उत्पाद के लिए पर्याप्त समान है. यदि विज्ञापन में फ्री बताकर साथ में शर्तें लागू वाली बात भी कही जा रही है तो इसे मिसलीडिंग माना जाएगा.
- विज्ञापन में धमकी या जल्दी खरीदने की बात भी नहीं कही जा सकती है. इसके अलावा मिलते-जुलते उत्पाद के विज्ञापन पर भी रोक लगा दी गई है. यही नहीं चैरिटी और पोषण संबंधी दावों में बच्चों के इस्तेमाल को मिसलीडिंग बताया जा सकता है. बच्चों को लेकर किसी भी तरह से गैर-वाजिब दावों पर पूरी तरह से पाबंदी होगी.


