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पीएम मोदी की दमदार स्पीच ही नहीं उनके एक्सप्रेशन की भी हो रही चर्चा

पीएम मोदी ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि कल मैंने देखा कि कुछ लोगों के भाषणों से पूरा इकोसिस्टम खुश हो गया. कुछ लोग बहुत खुश थे, “ये हुई ना बात (ऐसा होना चाहिए)”. पिछले नौ वर्षों में रचनात्मक आलोचना के बजाय बाध्यकारी आलोचकों ने कब्जा कर लिया है. कांग्रेस ने कहा कि भारत की बर्बादी हार्वर्ड में एक केस स्टडी होगी. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में हार्वर्ड ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया. विषय का नाम था द राइज एंड डिक्लाइन ऑफ इंडियाज कांग्रेस पार्टी.

विपक्ष और परोक्ष रूप से राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके अंदर की नफरत उनके भाषणों में खुलकर सामने आ गई. यहां सभी ने अपनी-अपनी बात रखी और तर्क रखे. वे अपनी रुचि, स्वभाव और विश्वदृष्टि के अनुसार बोले. उन्हें समझने की कोशिश में यह भी ख्याल आता है कि कौन कितना काबिल है, किसमें क्या काबिलियत है और किसकी क्या नीयत है. देश उनका मूल्यांकन भी कर रहा है

विभाजित दुनिया और अस्थिर वैश्विक माहौल के बीच जिस तरह से यह आगे बढ़ा है, उससे देश बेहद आश्वस्त है. 140 करोड़ भारतीयों का जोश किसी भी चुनौती से ज्यादा मजबूत है. फिर भी कुछ लोग इन सब बातों से परेशान हैं. उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए. सुधार मजबूरी से नहीं हो रहे हैं. वे दृढ़ विश्वास के कारण हो रहे हैं.

इस बार मैं धन्यवाद के साथ-साथ राष्ट्रपति जी को बधाई भी देना चाहता हूं. गणतंत्र की मुखिया के रूप में उनकी उपस्थिति न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि देश की करोड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा का भी एक बड़ा अवसर है. भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे ने कुछ तेजी से प्रगति की है. दुनिया ने “डिजिटल इंडिया” को नोटिस किया है. एक समय था जब हमारा देश बुनियादी तकनीकों के लिए भी संघर्ष करता था.

2004 से 2014 के बीच यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) ने हर अवसर को समस्या में बदल दिया. जब दुनिया प्रौद्योगिकी में प्रगति कर रही थी, तब वे 2जी घोटाले में फंस गए थे. 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की प्रगति को दुनिया के सामने दिखाने का अवसर आया, लेकिन वह भी एक बड़े घोटाले में बदल गया.

पिछले नौ साल विपक्ष ने आरोप लगाने में गंवाए, इस दौर में रचनात्मक आलोचना की जगह बाध्यकारी आलोचना ने ले ली. वोट बैंक की राजनीति ने देश को नुकसान पहुंचाया, भारत के विकास में देरी की; मध्यम वर्ग की उपेक्षा की गई लेकिन एनडीए सरकार ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की.

जो लोग अहंकार के नशे में चूर हैं और सोचते हैं कि उन्हें ही ज्ञान है, उन्हें लगता है कि मोदी को गाली देने से ही रास्ता निकलेगा, कि मोदी पर झूठे, बेतुके कीचड़ उछालने से ही रास्ता निकलेगा. वंचितों, गरीबों, आदिवासियों के कल्याण के लिए काम करना हमारी प्राथमिकता है; यही हमारा मिशन है. लोग जानते हैं कि मोदी संकट के समय उनकी मदद के लिए आए हैं, वे आपकी गालियों और आरोपों से कैसे सहमत होंगे.

करोड़ों लोगों का विश्वास मेरा सुरक्षा कवच है, इसे आपके (विपक्ष) गालियों, आरोपों से नहीं तोड़ा जा सकता. यूपीए का ट्रेडमार्क 2004-2014 से हर अवसर को संकट में बदलने देना था. सेना शौर्य दिखाती है तो उसकी आलोचना करते हैं; अगर जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करती हैं, तो वे उन पर हमला करते हैं: पीएम मोदी का विपक्ष पर तंज

लोगों का मोदी पर भरोसा अखबारों की सुर्खियों या टीवी विजुअल्स की वजह से नहीं बल्कि मेरे वर्षों के समर्पण की वजह से है. 2004-14 एक खोया हुआ दशक था, वर्तमान को भारत के दशक के रूप में जाना जाएगा: लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में पीएम मोदी.

विपक्ष खुद का खंडन करता रहता है, वे कहते हैं कि भारत कमजोर है और फिर आरोप लगाते हैं कि भारत दूसरे देशों पर दबाव बना रहा है. सिर्फ हार्वर्ड ही नहीं, दुनिया की तमाम बड़ी यूनिवर्सिटी कांग्रेस के पतन पर स्टडी करेंगी. निराशा में डूबे चंद लोग देश की प्रगति को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. उन्हें देश के लोगों की उपलब्धियां नहीं दिखतीं. यह देश के 140 करोड़ लोगों के प्रयासों का नतीजा है जिससे भारत का नाम हो रहा है. वे उन उपलब्धियों को नहीं देखते हैं.

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