नुआखाई त्यौहार पर भी पड़ा कोरोना का असर,अपने घरों में ही सिमट कर मनाएंगे किसान ख़ुशीहाली का पर्व नुआखाई

RGHNEWS प्रशांत तिवारी रायगढ़। नुआखाई त्यौहार आज पश्चिम ओड़िसा के साथ साथ छत्तीसगढ़ के ओड़िया संस्कृति के किसान मजदूर अपने अपने घरों में सिमट कर मनायेंगे । गणेश चतुर्थी के बाद ऋषि पंचमी को मनाया जाने वाला यह त्यौहार किसानों का खास त्यौहार है जो इस बार 23 अगस्त रविवार को मनाया जा रहा है।एकता एवम भाईचारे का प्रतीक नुआखाई पर कोरोना का असर दिख रहा है। लोगो मे उत्साह तो है लेकिन साथ मिलजुलकर मनाया नही जा सकता। इस दिन परिवार के सभी सदस्य चाहे वे दूर प्रदेश में क्यों न हो अपने पुश्तैनी घर आकर सपरिवार नवान्न भक्षण करते हैं।कोरोना संक्रमण के कारण यह सम्भव नही है। एक हफ्ते पूर्व ही गांव में मनाने के लिए इसकी मुनादी की जाती है। गांव का बैगा नए फसल का अन्न घर घर वितरण करता है। जिसका प्रसाद बनाकर ग्राम देवता ,ईस्ट देवता को भोग लगाया जाता है। किसान अपने खेत की खड़ी फसल की पूजा अर्चना करते हैं।सामुहिक रूप से परिवार में एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करने के साथ भोजन ग्रहण करते हैं। उसके बाद ईस्ट देवता से आशीर्वाद लेकर अपने से बड़ो का पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। यह अनूठी परम्परा गांवो में देखते ही बनती है। इसे ही नुआखाई भेंट घाट कहते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार यह त्यौहार फीकी तो नही भय के साथ ही मनाया जायेगा। रायगढ़ जिले के रायगढ़ पूर्वांचल ,पुसौर ,सरिया ,बरमकेला तमनार अंचल में यह त्यौहार परम्परागत तरीके से मनाया जायेगा।



