छत्तीसगढ़: दिव्यांग छात्रा के लिए हाईकोर्ट का फैसला

CG news:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में राज्य शासन के मेडिकल एजुकेशन के उस नियम को रद्द कर दिया है, जिसमें दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए कैटेगरी तय करते हुए ऊपरी हिस्से के अपंगता वाले बच्चों को मेडिकल एजुकेशन से वंचित कर दिया गया था। जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस एनके चंद्रवंशी की डिवीजन बेंच ने NEET क्वालीफाई छात्रा को दिव्यांग कोटे में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन देने का आदेश भी दिया है। दरअसल, मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने उनके हाथ में करंट लगने और दिव्यांगता के कारण एडमिशन देने से मना कर दिया था, जिससे परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
बसंतपुर की रहने वाली अंजली सोनकर 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद NEET की एग्जाम दी थी। इसमें उन्हें दिव्यांग कोटे से महासमुंद का मेडिकल कॉलेज आवंटित किया गया। NEET क्वालिफ़ाइड होने के बाद भी जब वह काउंसलिंग के लिए पहुंची, तब मेडिकल एजुकेशन के नियमों का हवाला देते हुए उनके ऊपरी हिस्से में अपंगता बताकर एडमिशन के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। इससे परेशान होकर अंजली सोनकर ने राज्य शासन के मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट में आवेदनपत्र प्रस्तुत की। लेकिन, उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। तब उन्होंने अपने एडवोकेट धीरज वानखेड़े के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की और दिव्यांग कोटे से एडमिशन देने की मांग की।
Read more:15 दिन बाद बिकेगा ये सरकारी बैंक, सरकार ने दी जानकारी
हाईकोर्ट ने नियम को किया रद्द
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता धीरज वानखेड़े ने बताया कि अंजली सोनकर को 2013 में बिजली करंट लगा था, जिससे उनका दाएं हाथ में विकलांगता आई। इसी आधार पर उन्हें दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिया गया है। यह अलग बात है कि शासन के बजाए उन्हें जिला स्तर पर प्रमाणपत्र दिया गया है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि वह दिव्यांग नहीं है।
CG news:याचिकाकर्ता की तरफ से यह भी तर्क दिया गया कि केंद्र सरकार ने दिव्यांगता प्रमाणपत्र सभी दिव्यांगों को देने का प्रावधान तय किया है। इसमें किसी तरह से ऊपरी और निचले स्तर की अपंगता का कोई उल्लेख नहीं है। ऐसे में शासन के मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट की ओर से दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए बनाए गए यह नियम भी अवैधानिक है। इस केस की सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस एनके चंद्रवंशी की डिवीजन बेंच ने दिव्यांगों के लिए तय किए गए नियम को ही रद्द कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता छात्रा को दिव्यांग कोटे से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन देने का आदेश दिया है।



