इसका ठेका सरकारी कंपनी BEL को मिला. तय समय पर काम पूरा नहीं हुआ, जिस पर BEL पर 17 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, लेकिन बाद में बिना कोई ठोस कारण बताए जुर्माना माफ कर दिया गया. आरोप है कि इसके बदले में सत्येंद्र जैन को ठेकेदारों के जरिए 7 करोड़ की रिश्वत दी गई.