Ujjain Nagchandreshwar Temple Bhagdad: महाकाल परिसर में भगदड़ जैसे हालात, 13 श्रद्धालु बेहोश, साढ़े 6 लाख लोगों ने सुबह किए दर्शन – RGH NEWS
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Ujjain Nagchandreshwar Temple Bhagdad: महाकाल परिसर में भगदड़ जैसे हालात, 13 श्रद्धालु बेहोश, साढ़े 6 लाख लोगों ने सुबह किए दर्शन

Ujjain Nagchandreshwar Temple Bhagdad मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान नागचंद्रेश्वर मंदिर, हरसिद्धि मंदिर और बड़े गणेश मंदिर के समीप अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण मंदिर मार्ग पर स्थिति बेकाबू हो गई, जिससे भारी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इस अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति में दबने से तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

 

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घायलों को पहुंचाया गया अस्पताल

घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में लगी है। सभी घायलों को तुरंत ही प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पास के जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। त्यौहारों के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर अब प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है।

 

साल में केवल एक दिन खुलने वाला अलौकिक धाम

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर भगवान का पावन धाम स्थापित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके कपाट वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के अवसर पर पूरे 24 घंटे के लिए खुलते हैं और इस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए खुलते हैं। इस दिन के अलावा पूरे साल मंदिर में दर्शन नहीं किए जा सकते हैं।

 

 

दुर्लभ प्रतिमा का रहस्य

मंदिर के गर्भगृह में स्थापित 11वीं शताब्दी की यह प्रतिमा कला और आस्था का अद्भुत संगम है। यहां देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती 10 से 11 फनों वाले विशाल शेषनाग के छत्र तले विराजमान हैं। इस मनमोहक स्वरूप में प्रथम पूज्य भगवान गणेश भी उनके साथ दिखाई देते हैं। माना जाता है कि संपूर्ण विश्व में भगवान शिव का ऐसा अनूठा स्वरूप कहीं देखने को नहीं मिलता।

 

इतिहास और पौराणिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार इस अद्वितीय मूर्ति की स्थापना लगभग 1050 ईस्वी में परमार वंश के प्रतापी राजा भोज के शासनकाल के दौरान हुई थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नागों के राजा तक्षका ने भगवान भोलेनाथ की कठोर तपस्या इसी स्थान पर की थी।

 

नागपंचमी पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब

Ujjain Nagchandreshwar Temple Bhagdadसाल भर में मात्र एक दिन दर्शन की सुविधा मिलने के कारण देश और दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु नागपंचमी पर उज्जैन पहुंचते हैं। लोक आस्था है कि नागपंचमी के शुभ संयोग पर नागचंद्रेश्वर देव के दर्शन मात्र से जातकों की कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष, सर्प दोष और अन्य ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।

 

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