Sonia gandhi: थाने पहुंचीं सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका गांधी को दिल्ली पुलिस ने किया रिहा..

Sonia gandhi दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार,स्पेशल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर देवेश श्रीवास्तव ने सभी स्पेशल कमिश्नर के साथ नई दिल्ली डीसीपी ऑफिस में मीटिंग की। राहुल गांधी,प्रियंका गांधी समेत सभी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने कागज़ी कार्रवाई के बाद रिहा कर दिया। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार मीटिंग से निकल गए थे, लेकिन बाकी स्पेशल कमिश्नर की मीटिंग जारी रही। बता दें कि तीन घंटे तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव के साथ डिटेन किए गए सभी नेताओं को रिहा किया गया।
जानें हिरासत में लेने के बाद क्यों हुई रिहाई
कांग्रेस के सभी नेताओं को 65 दिल्ली पुलिस एक्ट (65 DP Act) में बुक किया गया था और तीन घंटे की हिरासत में रखने के बाद सभी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने रिहा कर दिया। कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी खुद मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं थीं, जहां प्रियंका गांधी सहि विपक्ष के कुछ नेताओं को, जो लोक कल्याण मार्ग पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और जिन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था, कुछ देर पहले ही पुलिस स्टेशन लाया गया था।
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दिल्ली पुलिस एक्ट (Delhi Police Act) की धारा 65 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए उचित और वैध निर्देशों का पालन करने से इनकार करता है, विरोध करता है, या अनदेखी करता है, तो पुलिस अधिकारी उसे मौके से हटा सकता है, और बिना वारंट के हिरासत में ले सकता है।
नेताओं की रिहाई के बाद सचिन पायलट ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता सचिन पायलट (@SachinPilot) ने कहा, “लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LoP) और करीब 100-150 सांसद एक मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। हम कल युवाओं के साथ किए गए बर्ताव की निंदा करते हैं; उन पर लाठीचार्ज किया गया और छात्रों पर हमले हुए। सरकार और पुलिस का जो चेहरा सामने आया है, वह किसी को भी मंज़ूर नहीं है। जिस तरह लोकसभा में विपक्ष के नेता को ज़बरदस्ती हटाया गया… सवाल यह है कि सड़क का नाम बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ रखा गया है, तो जन-कल्याण के लिए राहुल गांधी वहां मौजूद थे।
Sonia gandhiपायलट ने कहा, सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा लेना चाहिए था, छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR वापस लेनी चाहिए थी और पेपर लीक के मामले पर बयान देना चाहिए था, लेकिन कई नेताओं को वहां से हटा दिया गया। यह लोकतंत्र के लिए एक काला दिन है। लोग नाराज़ हैं… जिस तरह राहुल गांधी को घसीटा गया, वह बर्दाश्त के बाहर है। लोग न्याय चाहते हैं और हम न्याय लेकर रहेंगे…”



