Rice price hike: चावल हुआ महंगा! कीमतों में 10% की बढ़ोतरी, निर्यात पर भी बढ़ेगा असर

Rice price hike देश में चावल का उत्पादन घटने की आशंका के बीच इसकी कीमतों में 10-25% तक बढ़ोतरी हुई है। कम बारिश और अल नीनो की परिस्थितियों के चलते इस साल चावल के उत्पादन में करीब 4.5% की गिरावट आने का अनुमान है। इसका असर अगले साल चावल के निर्यात पर भी पड़ सकता है। भारत का चावल निर्यात 2027 में 4% घटकर 2.4 करोड़ टन रह सकता है।
खुदरा बाजार में 10% महंगा हुआ चावल
देश में चावल की औसत खुदरा कीमत रविवार को 46.92 रुपये प्रति किलोग्राम रही। यह पिछले साल की तुलना में करीब 10% अधिक है। दक्षिण भारत में धान की बुवाई का रकबा घटने और बारिश की कमी के कारण सोना मसूरी, पोन्नी और स्वर्णा जैसी प्रीमियम गैर-बासमती किस्मों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 10-25% तक बढ़ोतरी हुई है।
चावल की बढ़ती कीमतों पर सरकार की नजर है। जरूरत पड़ने पर सरकार बफर स्टॉक से चावल बाजार में उतार सकती है। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, केंद्रीय पूल में सरकार के पास 3.8 करोड़ टन से अधिक चावल का भंडार है, जबकि 1 अक्टूबर के लिए बफर स्टॉक की निर्धारित जरूरत 1.025 करोड़ टन थी। इस अतिरिक्त भंडार का इस्तेमाल बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए किया जा सकता है।
अगले साल चावल निर्यात में 4% गिरावट का अनुमान
इस साल देश में कम बारिश का असर अगले साल चावल के निर्यात पर पड़ सकता है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के मुताबिक, भारत का चावल निर्यात 2027 में 4% घटकर 2.4 करोड़ टन रह सकता है। इसके पीछे टूटे चावल और सफेद चावल की विदेशी मांग में कमी, घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी और निर्यात के लिए उपलब्ध चावल की मात्रा घटने जैसे कारण हो सकते हैं।
भारत की वैश्विक चावल निर्यात में 40% से अधिक हिस्सेदारी है। ऐसे में देश के उत्पादन और निर्यात में गिरावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
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चावल उत्पादन में 4.5% गिरावट का अनुमान
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो की मजबूत परिस्थितियों के कारण मानसून प्रभावित हुआ है और इसका असर आगे भी जारी रह सकता है। इससे फसल वर्ष 2026-27 में भारत का चावल उत्पादन 4.5% घटकर 14.7 करोड़ टन रह सकता है। यदि ऐसा होता है, तो 2015-16 के बाद पहली बार भारत के चावल उत्पादन में गिरावट दर्ज की जा सकती है। फसल वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 15.4 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया था और वह दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बना था।
अमेरिकी कृषि विभाग ने 2027 के लिए वैश्विक चावल व्यापार के अनुमान में भी 13 लाख टन की कटौती की है। राइसविला के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सूरज अग्रवाल का कहना है कि कमजोर मानसून के कारण उत्पादन घटने की आशंका है, जिससे घरेलू बाजार में चावल की कीमतें बढ़ सकती हैं। वैश्विक चावल निर्यात में भारत की 40-45% हिस्सेदारी को देखते हुए, यहां आपूर्ति घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की उपलब्धता और कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
चावल निर्यात से 4.81 अरब डॉलर की कमाई
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त के बीच भारत का चावल निर्यात सालाना आधार पर 2.17% बढ़कर 4.81 अरब डॉलर रहा। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी उथल-पुथल और संघर्ष के कारण आपूर्ति शृंखला में बाधा तथा माल ढुलाई की बढ़ती लागत निर्यात कारोबार को प्रभावित कर रही है।
कारोबार से जुड़े मीडिया सूत्रों के मुताबिक, घरेलू उत्पादन में संभावित गिरावट और चावल की बढ़ती कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष के बाकी महीनों में निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। घरेलू मांग पूरी करने और निर्यात के लिए पर्याप्त मात्रा में चावल उपलब्ध कराने के बीच संतुलन बनाए रखना कारोबारियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
धान की खेती का रकबा 3.7% घटा
चालू खरीफ सीजन में धान की खेती का रकबा पिछले सीजन के मुकाबले 3.7% घटकर 4.292 करोड़ हेक्टेयर रह गया है। कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में धान के रकबे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
Rice price hikeआंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक में धान का रकबा 4.6 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 4.3 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 1.8 लाख हेक्टेयर और तमिलनाडु में 1.5 लाख हेक्टेयर घटा है। धान की खेती के क्षेत्रफल में कमी और बारिश की कमी का असर आने वाले समय में उत्पादन पर पड़ सकता है।